चोरी के शक में भीड़ ने दौड़ाया, जान बचाने के लिए नहर में कूदने से हिंदू युवक की मौत
बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं और थमने का नाम नहीं ले रही हैं। पड़ोसी देश में उन्मादी भीड़ द्वारा कभी ईशनिंदा तो कभी चोरी के आरोप लगाकर हिंदुओं की बेरहमी से हत्या की जा रही है। नौगांव जिले के महादेवपुर में सामने आया ताजा मामला इस हिंसा की भयावह तस्वीर पेश करता है।
अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की एक और घटना बांग्लादेश के नौगांव जिले के महादेवपुर इलाके में हुई। चोरी के संदेह में पीछा कर रही भीड़ से जान बचाने के प्रयास में एक हिंदू युवक ने नहर में छलांग लगा दी, जहां उसकी डूबने से मौत हो गई। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मृतक की पहचान भंडारपुर गांव निवासी मिथुन सरकार के रूप में हुई है। पुलिस ने मंगलवार दोपहर को उसका शव बरामद किया। बीते 48 घंटों में यह तीसरा मामला है, जिसमें किसी हिंदू की जान गई है, जबकि पिछले 18 दिनों में सात हिंदुओं की हत्या की जा चुकी है।
स्थानीय समाचारों के मुताबिक, उन्मादी भीड़ ने मिथुन सरकार को चोरी के शक में दौड़ाया था। जान बचाने के लिए वह नहर में कूद गया, लेकिन बाहर नहीं निकल सका। कुछ समय बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने शव बरामद किया। फिलहाल इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है कि मिथुन वास्तव में किसी चोरी की घटना में शामिल था या नहीं। इससे पहले सोमवार को नरसिंगदी जिले में किराना दुकान चलाने वाले हिंदू युवक शरत चक्रवर्ती मणि की भी उन्मादी भीड़ ने हत्या कर दी थी। उसी दिन जशोर के मनीरामपुर इलाके में एक हिंदू पत्रकार राणा प्रताप बैरागी की गोली मारकर और फिर गला रेतकर नृशंस हत्या कर दी गई थी। इससे पूर्व राजधानी ढाका से सटे नरसिंगदी इलाके में 40 वर्षीय हिंदू युवक शरत चक्रवर्ती मणि पर चरमपंथियों ने धारदार हथियारों से हमला कर उनकी हत्या कर दी। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार हमलावरों ने उनसे हिंदू होने के कारण जजिया टैक्स की मांग की थी। शरत चक्रवर्ती मणि कुछ वर्ष पहले दक्षिण कोरिया में काम करते थे और बाद में बांग्लादेश लौट आए थे। इससे पहले भी जशोर जिले के मनीरामपुर में 45 वर्षीय हिंदू पत्रकार राणा प्रताप बैरागी की सिर में गोली मारकर हत्या कर दी गई। वह एक अखबार के संपादक भी थे। हमलावरों ने पहले उनके सिर में कई गोलियां मारीं और बाद में गला काट दिया। पुलिस का कहना है कि आरोपियों की तलाश जारी है।
हिंसा भड़कने के बाद से हिंदुओं की हत्याओं के प्रमुख मामले
हिंसा की इस कड़ी में 3 जनवरी को शरीयतपुर जिले में हिंदू व्यवसायी खोकन चंद्र दास को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला और आग लगा दी। जान बचाने के लिए वह तालाब में कूद गए थे, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। दिसंबर 2025 के अंत में मयमनसिंह में कपड़ा कारखाने में काम कर रहे 40 वर्षीय ब्रजेंद्र बिस्वास की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। 24 दिसंबर को राजबाड़ी में कथित जबरन वसूली के आरोप में 29 वर्षीय अमृत मंडल को पीट-पीटकर मार डाला गया। वहीं, 18 दिसंबर को मयमनसिंह में 29 वर्षीय दीपू चंद्र दास की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई और उनके शव को आग के हवाले कर दिया गया।






