
महिलाओं में स्तन यानी ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बीते कुछ दशकों में तेजी से बढ़ा है। आईसीएमआर ने इस समस्या को लेकर गंभीर चिंता जताई है। आईसीएमआर के हालिया अध्ययन के अनुसार, भारत में महिलाओं को होने वाले तीन प्रमुख कैंसरों में ब्रेस्ट कैंसर शामिल है।
जिस तेजी से कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं, उसने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता को और गहरा कर दिया है। पहले यह माना जाता था कि कैंसर उम्र बढ़ने के साथ होने वाली बीमारी है, लेकिन अब 20 वर्ष से कम उम्र के युवा और यहां तक कि बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में दुनियाभर में जिन बीमारियों ने सबसे अधिक परेशान किया है, उनमें कैंसर और हृदय रोग प्रमुख हैं।
महिलाओं में स्तन कैंसर यानी ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बीते कुछ दशकों में तेजी से बढ़ा है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने इस बढ़ती समस्या को लेकर गंभीर चिंता जताई है। आईसीएमआर के हालिया अध्ययन के अनुसार, भारत में महिलाओं को होने वाले तीन प्रमुख कैंसरों में ब्रेस्ट कैंसर शामिल है। खासतौर पर 50 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में इसका जोखिम लगभग तीन गुना तक बढ़ जाता है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या समय रहते कुछ उपाय अपनाकर स्तन कैंसर के खतरे को कम किया जा सकता है? आइए इसे विस्तार से समझते हैं।
भारतीय महिलाओं में बढ़ता स्तन कैंसर का खतरा
साल 2023 के आंकड़ों के अनुसार, ब्रेस्ट कैंसर भारतीय महिलाओं में सबसे आम कैंसर बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर बीमारी का पता न चल पाना इसकी गंभीरता को और बढ़ा देता है। 50 प्रतिशत से अधिक मामले तीसरे या चौथे स्टेज में सामने आते हैं। जागरूकता की कमी, सामाजिक झिझक और समय पर जांच न हो पाने के कारण स्तन कैंसर का जोखिम लगातार बढ़ रहा है। इससे बचाव और खतरे को कम करने के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने महिलाओं को दो सरल उपाय अपनाने की सलाह दी है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय
डॉक्टरों के अनुसार, नींद की कमी, बढ़ता तनाव और आनुवांशिक कारण महिलाओं में इस गंभीर बीमारी के जोखिम को बढ़ा देते हैं। जिन महिलाओं के परिवार में पहले कैंसर का इतिहास रहा है, उन्हें विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि कम उम्र से ही दो बातों पर ध्यान देना जरूरी है, अच्छी और पूरी नींद लेना तथा पेट की चर्बी (बेली फैट) को कम करना। ये दोनों कारक स्तन कैंसर के खतरे को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। समय रहते इन पर नियंत्रण कर लिया जाए तो भविष्य में ब्रेस्ट कैंसर से बचाव संभव है।
नींद की कमी क्यों है खतरनाक
डॉक्टर बताते हैं कि पर्याप्त नींद न लेना कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म देता है, जिनमें कैंसर का खतरा भी शामिल है। नींद पूरी न होने से मेलाटोनिन सहित कई हार्मोनों में असंतुलन पैदा हो सकता है। इसके साथ ही इम्यून सिस्टम कमजोर होने और शरीर में क्रोनिक सूजन बढ़ने का खतरा रहता है, जो ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकता है। यही वजह है कि नाइट शिफ्ट में काम करने वाली महिलाओं को स्तन कैंसर के प्रति विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
बेली फैट कम करना है जरूरी
नींद की कमी के साथ-साथ पेट की चर्बी को भी ब्रेस्ट कैंसर का एक बड़ा जोखिम कारक माना जाता है, खासकर मेनोपॉज के बाद की महिलाओं में। बेली फैट बढ़ने से एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर असंतुलित हो सकता है और शरीर में क्रोनिक इंफ्लेमेशन का खतरा बढ़ जाता है, जिससे कैंसर का जोखिम भी बढ़ता है। शोधों में पाया गया है कि पेट की चर्बी अन्य फैट की तुलना में ज्यादा खतरनाक होती है, क्योंकि यह हार्मोन रिसेप्टर्स को गंभीर रूप से प्रभावित करती है। यदि बेली फैट को नियंत्रित कर लिया जाए, तो कई प्रकार के कैंसर से बचाव संभव हो सकता है।
नोट: उपरोक्त जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी बीमारी से जुड़ी अधिक जानकारी या उपचार के लिए अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।





