
मुंबई में मेयर पद को लेकर सियासी खींचतान तेज होती जा रही है। इस बीच शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि एकनाथ शिंदे भी मुंबई में भाजपा का मेयर नहीं चाहते। उन्होंने होटल पॉलिटिक्स पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि शिंदे गुट के कई पार्षद उनके संपर्क में हैं।
चुनाव नतीजों के बाद मेयर पद को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने भाजपा से ढाई-ढाई साल के फार्मूले पर मेयर पद की मांग की है और अपने पार्षदों को होटल में ठहराया गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विवाद से इनकार किया है, लेकिन शिवसेना (यूबीटी) इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सक्रिय हो गई है। पहले उद्धव ठाकरे के बयान से हलचल बढ़ी, अब संजय राउत के दावे ने सियासी पारा और चढ़ा दिया है। मीडिया से बातचीत में संजय राउत ने कहा कि शिंदे गुट के पार्षदों को होटल में बंद कर रखना कानून-व्यवस्था का गंभीर मुद्दा है। उनका आरोप है कि पार्षदों को डराया जा रहा है और उन्हें तोड़े जाने की आशंका के चलते ताज होटल में कड़े पुलिस पहरे में रखा गया है। राउत ने इसे पार्षदों के अधिकारों का हनन बताया और कहा कि सभी पार्षदों को तुरंत रिहा किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वे और उनके सहयोगी पार्षदों से मिलने ताज होटल जा सकते हैं। राउत का दावा है कि शिंदे गुट के कई पार्षद भाजपा का मेयर नहीं चाहते और स्वयं एकनाथ शिंदे भी इस पक्ष में नहीं हैं।
बीएमसी की सत्ता का गणित
बीएमसी चुनाव में भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन अकेले दम पर मेयर बनाने की स्थिति में नहीं है। बहुमत के लिए उसे शिवसेना की जरूरत है। शिंदे गुट की शिवसेना को 29 सीटें मिली हैं। दोनों दलों को मिलाकर कुल संख्या 118 होती है, जबकि 227 सदस्यीय बीएमसी में बहुमत का आंकड़ा 114 है। यानी महायुति के पास बहुमत से सिर्फ चार सीटें ज्यादा हैं। वहीं शिवसेना (यूबीटी) के पास 65 पार्षद हैं, कांग्रेस के 24, मनसे के 6, एनसीपी (शरद पवार गुट) का 1, एआईएमआईएम के 8 और सपा के 2 पार्षद हैं। ऐसे में यदि महाविकास अघाड़ी महायुति के कुछ पार्षदों का समर्थन जुटा लेती है, तो बीएमसी में मेयर बनाने का रास्ता खुल सकता है। यही वजह है कि मुंबई नगर निगम की सत्ता की लड़ाई बेहद रोचक हो गई है।






