एडीजी मेरठ जोन के नेतृत्व में एसआईटी गठित, पांच दिन में देगी रिपोर्ट

नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की दर्दनाक मौत के मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए नोएडा प्राधिकरण के सीईओ लोकेश एम को उनके पद से हटा दिया गया है। साथ ही, पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया गया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर गठित एसआईटी को पांच दिनों के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए गए हैं। टीम हादसे के कारणों, संबंधित विभागों की भूमिका, लापरवाही की जिम्मेदारी तय करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के उपायों की विस्तृत जांच करेगी। एसआईटी का नेतृत्व एडीजी जोन मेरठ करेंगे। उनके साथ मंडलायुक्त मेरठ और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के चीफ इंजीनियर को भी टीम में शामिल किया गया है। जांच के दौरान जलनिकासी व्यवस्था, सड़क निर्माण की गुणवत्ता, चेतावनी संकेतों की उपलब्धता और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली की भी समीक्षा की जाएगी। सीएम योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जांच में यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही या दोष पाया गया, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सीईओ को हटाने की कार्रवाई को प्रशासनिक जवाबदेही की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 क्षेत्र में भारी जलभराव के दौरान सॉफ्टवेयर इंजीनियर की कार पानी से भरे गड्ढे/अंडरपास में फंस गई थी। कार समेत डूबने से उनकी मौत हो गई। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन, विकास प्राधिकरण और संबंधित एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे थे।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई
मृतक इंजीनियर युवराज मेहता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आ चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार, मृत्यु का कारण दम घुटना बताया गया है। डॉक्टरों के मुताबिक युवराज के फेफड़ों में करीब साढ़े तीन लीटर पानी पाया गया, जिससे स्पष्ट होता है कि वे काफी देर तक पानी में डूबे रहे। लंबे समय तक पानी में रहने से ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित हुई और शरीर पर अत्यधिक दबाव पड़ने से हार्ट फेलियर हुआ, जो मौत का तत्काल कारण बना।





