
सोने-चांदी की कीमतों में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई है, जिससे सर्राफा बाजार में हड़कंप मच गया। मार्च वायदा में चांदी के भाव 24 घंटे के भीतर करीब 85 हजार रुपये तक टूट गए, जबकि सोने की कीमतों में भी भारी गिरावट देखने को मिली है।
शुक्रवार को सोना-चांदी के बाजार में अचानक आई तेज गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया। बीते कई दिनों से लगातार नए रिकॉर्ड बना रही कीमती धातुओं में एकाएक तेज बिकवाली देखने को मिली। महज 24 घंटे के भीतर चांदी अपने ऑल टाइम हाई से लगभग 85 हजार रुपये नीचे आ गई, वहीं सोने के दाम भी करीब 25 हजार रुपये से अधिक लुढ़क गए। एमसीएक्स पर गुरुवार शाम तक मार्च वायदा में चांदी 4,20,048 रुपये प्रति किलो के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच चुकी थी। लेकिन शुक्रवार को बाजार खुलते ही इसमें जोरदार बिकवाली शुरू हो गई। दोपहर करीब 3:30 बजे तक चांदी का भाव लगभग 65 हजार रुपये गिरकर 3,35,001 रुपये प्रति किलो पर आ गया। इस तरह एक ही दिन में चांदी की कीमत में करीब 85 हजार रुपये की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। गौरतलब है कि हाल के कुछ ही हफ्तों में चांदी 3 लाख से बढ़कर 4 लाख रुपये के स्तर तक पहुंची थी।
सोने के भाव भी लुढ़के
चांदी के साथ-साथ सोने की कीमतों में भी तेज गिरावट देखी गई। गुरुवार 29 जनवरी को सोना वायदा बाजार में 1,93,096 रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर था, लेकिन शुक्रवार को इसमें भारी गिरावट आई और भाव टूटकर 1,67,406 रुपये पर आ गए। यानी एक ही दिन में सोने के दाम में करीब 25,500 रुपये की कमी दर्ज की गई। इस गिरावट का असर देशभर के सर्राफा बाजारों के साथ-साथ जयपुर में भी साफ दिखाई दिया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, फिलहाल सोने-चांदी के भावों में काफी उतार-चढ़ाव बना हुआ है, जिसके चलते निवेशक सतर्क हो गए हैं। इसका सबसे ज्यादा असर व्यापारियों पर पड़ा है और बाजार में बिक्री लगभग ठप हो गई है। वहीं, निवेशक अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए सोने-चांदी की खरीद-बिक्री को प्राथमिकता दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट मुख्य रूप से मुनाफावसूली का नतीजा है। लगातार तेजी और नए उच्च स्तर बनने के बाद निवेशकों ने लाभ सुरक्षित करने के लिए बिकवाली शुरू कर दी। बिकवाली का दबाव बढ़ते ही शॉर्ट सेलर्स भी सक्रिय हो गए, जिससे खासकर चांदी में गिरावट और तेज हो गई। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीमती धातुओं के दाम कमजोर होने का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ा। डॉलर में मजबूती और वैश्विक स्तर पर तनाव कम होने के संकेतों ने भी सोने-चांदी की मांग को कमजोर किया है। अमेरिकी राजनीति से जुड़े बयानों और फेडरल रिजर्व को लेकर अनिश्चितता घटने की उम्मीद के चलते सुरक्षित निवेश की मांग में कमी आई।
निवेशकों की बढ़ी चिंता
सोने और चांदी की कीमतों में आई इस बड़ी गिरावट का असर ईटीएफ बाजार में भी नजर आया। गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ में करीब 20 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। अब बाजार की नजर इस बात पर टिकी है कि यह गिरावट अस्थायी साबित होती है या आगे और कमजोरी देखने को मिलेगी।





