
मणिपुर में करीब एक साल से लागू राष्ट्रपति शासन को समाप्त कर दिया गया है। भाजपा नेता और विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष युमनाम खेमचंद सिंह ने राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण कर ली है।
बुधवार को केंद्र सरकार ने राष्ट्रपति शासन हटाने का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया। इसके तुरंत बाद युमनाम खेमचंद सिंह ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसे राज्य में राजनीतिक स्थिरता की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के फरवरी 2025 में इस्तीफे के बाद मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हस्ताक्षर से जारी अधिसूचना के साथ ही नई सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त हुआ। भाजपा विधायक युमनाम खेमचंद सिंह ने शाम छह बजे लोक भवन में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, जिसे राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने दिलाई। शपथ ग्रहण के बाद खेमचंद सिंह ने कहा कि उनका नेतृत्व मणिपुर को शांति, विकास और सुशासन की दिशा में आगे ले जाएगा। उन्हें दिल्ली में हुई भाजपा विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से एनडीए विधायक दल का नेता चुना गया था। वे मेइती समुदाय से आते हैं। मुख्यमंत्री के साथ दो उपमुख्यमंत्रियों ने भी शपथ ली—कुकी समुदाय से नेमचा किपगेन और नागा समुदाय से लोसि दीखो। इससे राज्य में सामाजिक और जातीय संतुलन साधने का प्रयास झलकता है। नए गृह मंत्री गोविंदास कोंथौजम भी शपथ ग्रहण समारोह में शामिल रहे।
राज्य में यह राजनीतिक बदलाव जातीय तनाव और अस्थिरता के दौर के बीच हुआ है। एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद विधानसभा निलंबित थी, हालांकि उसे भंग नहीं किया गया था। मौजूदा विधानसभा में भाजपा के 37 विधायक हैं, एनपीपी के 6, एनपीएफ के 5 और तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी एनडीए को प्राप्त है, जिससे गठबंधन के पास स्पष्ट बहुमत है। शपथ ग्रहण समारोह में भाजपा के केंद्रीय पर्यवेक्षक तरुण चुग, पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह, राज्य भाजपा अध्यक्ष सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। मुख्यमंत्री बनने से पहले खेमचंद सिंह ने राज्यपाल से मिलकर सरकार गठन का दावा पेश किया था। भाजपा का कहना है कि नए नेतृत्व में मणिपुर “विकसित भारत, विकसित मणिपुर” के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ेगा।






