
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों पर स्वचालित टोल संग्रह व्यवस्था लागू करने की तैयारी में है। इस नई प्रणाली के लागू होने से टोल वसूली की प्रक्रिया तेज और बाधारहित होगी।
केंद्रीय मंत्रालय की योजना के मुताबिक, एक्सप्रेसवे और नेशनल हाईवे पर ऑटोमैटिक टोल कलेक्शन सिस्टम शुरू किया जाएगा। यह व्यवस्था मार्च 2026 से चुनिंदा मार्गों पर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू हो सकती है। प्रस्तावित सिस्टम में हाईवे पर लगाए गए कैमरे वाहनों की नंबर प्लेट स्कैन करेंगे और तय की गई दूरी के आधार पर टोल शुल्क सीधे चालक के खाते से वसूल किया जाएगा। वर्तमान में देश के करीब 1.5 लाख किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग और एक्सप्रेसवे नेटवर्क में से लगभग 45,000 किलोमीटर पर टोल वसूला जाता है। देशभर में 1,000 से अधिक टोल प्लाजा हैं, जहां अक्सर वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं। खासतौर पर तब परेशानी बढ़ जाती है, जब किसी वाहन में फास्टैग नहीं होता या उसका खाता निष्क्रिय अथवा ब्लॉक रहता है।
कैसे काम करेगा नया सिस्टम
सरकार भौतिक टोल बैरियर हटाकर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक लागू करने की तैयारी कर रही है। इस तकनीक के तहत हाईवे पर लगे कैमरे वाहन की नंबर प्लेट पढ़ेंगे और तय दूरी के अनुसार टोल राशि की गणना करेंगे। इसके लिए कुछ स्थानों पर टेंडर प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है और आगे चलकर इसे देशभर में लागू करने की योजना है।
मंत्रालय ने साफ किया है कि कैमरा-आधारित नई प्रणाली के बावजूद फास्टैग की आवश्यकता बनी रहेगी। वाहन की पहचान और दूरी तय करने का काम कैमरे करेंगे, जबकि टोल भुगतान मौजूदा फास्टैग प्रणाली के माध्यम से ही किया जाएगा। कई फास्टैग खाते डिजिटल वॉलेट से जुड़े होते हैं, न कि सीधे बैंक खातों से। ऐसे में मौजूदा भुगतान प्रक्रिया में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया जाएगा। नई तकनीक का मकसद सिर्फ टोल वसूली को तेज, सुचारू और बिना रुकावट के बनाना है।
नई व्यवस्था से टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत काफी हद तक कम हो जाएगी, जिससे लंबी कतारों से राहत मिलेगी और यात्रा समय भी घटेगा। हालांकि फिलहाल फास्टैग अनिवार्य रहेगा, इसलिए वाहन चालकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका फास्टैग सक्रिय हो और उसमें पर्याप्त बैलेंस मौजूद रहे।






