
फिल्म निर्माता विक्रम भट्ट को धोखाधड़ी के मामले में बड़ी राहत मिली है। वे पिछले दो महीनों से जेल में बंद थे। आइए जानते हैं कि इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने क्या अहम टिप्पणी की।
शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को जमानत दे दी। दोनों 7 दिसंबर से हिरासत में थे। उन पर उदयपुर के एक कारोबारी को भारी मुनाफे का लालच देकर निवेश के नाम पर धोखाधड़ी करने का आरोप है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने आदेश दिया कि दोनों को उदयपुर जेल से तुरंत रिहा किया जाए। साथ ही चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया गया कि वे नियमानुसार शर्तें तय कर बेल आदेश जारी करें। अदालत ने शिकायतकर्ता अजय मुर्डिया और राजस्थान सरकार को नोटिस जारी कर 19 फरवरी की अगली सुनवाई में उपस्थित होने को कहा है।
इससे पहले 31 जनवरी को राजस्थान हाईकोर्ट ने इसी मामले में दोनों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं और कहा था कि फिलहाल आरोपियों को राहत देना उचित नहीं होगा। शिकायत दर्ज होने के बाद 7 दिसंबर को उन्हें मुंबई से गिरफ्तार कर उदयपुर लाया गया था।
मामले के अनुसार, उदयपुर के व्यापारी अजय मुर्डिया ने आरोप लगाया कि विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी ने फिल्म निर्माण में निवेश के नाम पर लगभग 30 करोड़ रुपये लिए, लेकिन रकम का सही इस्तेमाल नहीं किया। आरोप यह भी है कि अलग-अलग नामों से फर्जी बिल लगाकर अतिरिक्त धनराशि ली गई और फिल्म के लिए लिया गया पैसा निजी खाते में जमा कराया गया।





