
चंडीगढ़ स्थित शाखा में लगभग 590 करोड़ रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन
मामला सामने आने के बाद बैंक को बड़ा झटका लगा है। घटना का खुलासा तब हुआ जब हरियाणा सरकार के एक विभाग ने अपना खाता बंद कर राशि दूसरे बैंक में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया। सोमवार को बाजार खुलते ही बैंक के शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली और स्टॉक में 20% का लोअर सर्किट लग गया। सूचना सार्वजनिक होते ही शेयर गिरकर 66.85 रुपये पर पहुंच गया, जो पिछले आठ महीनों का न्यूनतम स्तर है। बैंक ने नियामकीय सूचना में बताया कि संबंधित खातों के मिलान के दौरान लगभग 590 करोड़ रुपये की राशि संदिग्ध पाई गई है। वास्तविक वित्तीय प्रभाव जांच, दावों की पुष्टि, संभावित रिकवरी और कानूनी कार्रवाई के बाद स्पष्ट होगा। इस घटनाक्रम ने बैंक की आंतरिक नियंत्रण व्यवस्था और जोखिम प्रबंधन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। खाता बंद करने की प्रक्रिया के दौरान विभाग द्वारा बताई गई राशि और खाते में उपलब्ध रकम में अंतर पाया गया। इसके बाद बैंक ने विस्तृत जांच शुरू की, जिसमें संदिग्ध लेन-देन के संकेत मिले।
सरकारी पैनल से हटाए गए बैंक
मामला सामने आने के बाद राज्य सरकार ने एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक और आईडीएफसी फर्स्ट बैंक को तत्काल प्रभाव से सरकारी कार्यों के पैनल से बाहर कर दिया है। वित्त विभाग ने निर्देश जारी कर सभी विभागों, बोर्डों, निगमों और सार्वजनिक उपक्रमों को इन बैंकों से खाते बंद कर धनराशि अन्य बैंकों में स्थानांतरित करने को कहा है। जांच में यह भी पाया गया कि कुछ फिक्स्ड डिपॉजिट निर्देशों का पालन नहीं किया गया और रकम सेविंग खाते में रखी गई, जिससे अपेक्षित रिटर्न नहीं मिला। बैंक के अनुसार, चंडीगढ़ शाखा में राज्य सरकार से जुड़े कुछ खातों में अनधिकृत लेन-देन हुए हैं, जिनमें कुछ कर्मचारियों और बाहरी व्यक्तियों की संलिप्तता की आशंका है। बैंक का कहना है कि मामला सीमित खातों तक ही प्रतीत होता है और अन्य ग्राहकों के खातों पर कोई असर नहीं पड़ा है। प्रारंभिक जांच के बाद चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। फॉरेंसिक ऑडिट के लिए स्वतंत्र एजेंसी नियुक्त की जा रही है और पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी गई है। संदिग्ध खातों में रकम फ्रीज कराने के लिए अन्य बैंकों से भी संपर्क किया गया है। बैंक ने दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।





