
- बहन को 4 दिन कमरे में कैद रखा, पिता का शव टुकड़ों में फेंकता रहा
- पिता के दोस्त से बोला, अंकल… पापा ने आत्महत्या कर ली है
पिता-पुत्र का रिश्ता विश्वास, स्नेह और संरक्षण की बुनियाद पर टिका होता है और इसे दुनिया के सबसे अनमोल संबंधों में गिना जाता है। ऐसे में जब यही रिश्ता हिंसा में बदल जाए तो घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं रहती, बल्कि समाज के नैतिक और मनोवैज्ञानिक ढांचे पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। आधुनिक डिजिटल दौर में युवाओं का भावनात्मक संतुलन, पारिवारिक संवाद और मानसिक दबाव जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में हैं। इसी पृष्ठभूमि में राजधानी में सामने आई एक सनसनीखेज घटना ने सभी को झकझोर दिया है।
खौफनाक हत्याकांड ने तोड़ी रिश्तों की मर्यादा
शहर के आशियाना क्षेत्र में शराब कारोबारी और पैथोलॉजी संचालक 49 वर्षीय मानवेंद्र सिंह की हत्या उनके ही 21 वर्षीय बेटे अक्षत प्रताप सिंह ने कथित रूप से गोली मारकर कर दी। पुलिस के अनुसार हत्या के बाद आरोपी ने शव को आरी से काटकर टुकड़ों में बांट दिया। हाथ-पैर पारा के सदरौना इलाके में फेंक दिए गए, जबकि सिर सहित धड़ घर में एक ड्रम में छिपा मिला। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर हत्या और साक्ष्य छिपाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
शक से बचने के लिए रची गुमशुदगी की कहानी
हत्या के बाद अक्षत लगातार घर से बाहर जाता रहा और पड़ोसियों से कहता रहा कि उसके पिता 19 फरवरी को काम से दिल्ली गए हैं और लौटे नहीं। उसने खुद 20 फरवरी को थाने में गुमशुदगी की शिकायत भी दर्ज कराई, ताकि उस पर शक न हो। लेकिन पड़ोसियों को संदेह हुआ और उन्होंने सीसीटीवी फुटेज खंगाले, जिसमें मानवेंद्र रात में घर आते तो दिखे, पर बाहर जाते नहीं दिखे। इसी आधार पर पुलिस को सूचना दी गई। जब पड़ोसियों की पड़ताल बढ़ी तो घबराकर आरोपी ने पिता के मित्र सोनू को फोन कर कहा कि “पापा ने आत्महत्या कर ली है।” सोनू तुरंत घर पहुंचे और पूछताछ की। पहले तो अक्षत टालमटोल करता रहा, लेकिन सख्ती से पूछने पर उसने पूरी घटना कबूल कर ली। इसके बाद उसे हिरासत में लिया गया। पुलिस जांच में सामने आया कि पिता बेटे पर मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी का दबाव बना रहे थे। 20 फरवरी तड़के लगभग 4:30 बजे इसी बात को लेकर दोनों के बीच तीखी बहस हुई। आरोप है कि गुस्से में आकर अक्षत ने लाइसेंसी राइफल से पिता के सिर में गोली मार दी, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
सबूत मिटाने की कोशिश
हत्या के बाद आरोपी ने खून से सने बिस्तर और कपड़े कार में रखकर अमौसी इलाके में जलाए। पहले उसने शव को कार से ले जाकर गोमती नदी में फेंकने की योजना बनाई, पर वजन ज्यादा होने से ऐसा नहीं कर सका। बाद में आरी खरीदकर शव के टुकड़े किए और धड़ को ड्रम में डाल दिया।
बहन को चार दिन तक रखा कमरे में बंद
घटना के समय आरोपी की छोटी बहन घर में ही थी। गोली की आवाज सुनकर वह कमरे में पहुंची तो पिता का शव देखकर चीख पड़ी। आरोप है कि भाई ने उसे जान से मारने की धमकी देकर चुप करा दिया और चार दिन तक कमरे में बंद रखा। पुलिस ने उसकी काउंसिलिंग कराई है, लेकिन वह अभी भी सदमे में है। जांच में यह भी पता चला कि चार माह पहले घर से जेवर चोरी हुए थे। पिता ने पहले कामवाली पर शक जताया, लेकिन बाद में बेटे की करतूत सामने आने पर शिकायत वापस ले ली थी और उसकी गतिविधियों पर नजर रखने लगे थे।
पारिवारिक और शैक्षणिक पृष्ठभूमि
परिजनों के अनुसार आरोपी ने अपनी स्कूली पढ़ाई ला मार्टिनियर कॉलेज से की थी और बाद में बीबीए की पढ़ाई कर रहा था। उसकी मां का निधन 2017 में हो चुका है। दादा, जो सेवानिवृत्त दरोगा हैं, जालौन में रहते हैं और सूचना मिलते ही मौके पर पहुंच गए।
‘नीला ड्रम’ तरीका पहले भी चर्चा में
इस वारदात के बाद ‘नीला ड्रम’ में शव छिपाने का तरीका फिर चर्चा में आ गया। इससे पहले मेरठ के ब्रह्मपुरी इलाके के चर्चित हत्याकांड में भी आरोपियों ने शव के टुकड़े कर ड्रम में भरकर ठिकाने लगाने की कोशिश की थी।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक मामले के कई पहलुओं की गहन जांच की जा रही है, जिनमें हत्या की वास्तविक परिस्थितियां, आरोपी का मानसिक दबाव, पारिवारिक संबंधों की स्थिति और घटना के बाद सबूत मिटाने की रणनीति शामिल है। बरामद सामान ड्रम, आरी, कार और अन्य वस्तुएं फॉरेंसिक जांच के लिए भेजी गई हैं।
यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि आधुनिक पारिवारिक तंत्र, युवा मानसिक स्वास्थ्य, परीक्षा-दबाव और संवादहीनता जैसे जटिल सामाजिक प्रश्नों की ओर भी संकेत करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते तनाव, प्रतिस्पर्धा और भावनात्मक दूरी को समय रहते समझना और संभालना अब परिवारों के लिए पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है।






