
इस्राइल-अमेरिका की संयुक्त सैन्य कार्रवाई ने पश्चिम एशिया में स्थिति को बेहद संवेदनशील बना दिया है। जवाबी हमलों और एयरस्पेस बंद होने से क्षेत्रीय संघर्ष के व्यापक रूप लेने की आशंका बढ़ गई है।
दुनिया में तनाव तेजी से बढ़ता दिख रहा है। अफगानिस्तान-पाकिस्तान क्षेत्र में जारी तनाव के बीच अब इस्राइल ने संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ मिलकर ईरान पर व्यापक सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार राजधानी तेहरान समेत कई शहरों में एक साथ 30 स्थानों को निशाना बनाते हुए रॉकेट दागे गए, जिससे जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं और कई जगह धुएँ के गुबार उठते देखे गए। इस सैन्य कार्रवाई को इस्राइल ने “ऑपरेशन शील्ड ऑफ जूडा” नाम दिया है। रक्षा अधिकारियों के मुताबिक यह पूर्व-नियोजित प्री-एम्पटिव स्ट्राइक थी। हमलों के बाद पूरे देश में आपात स्थिति घोषित कर दी गई और नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर रहने के निर्देश दिए गए। संभावित जवाबी हमले की आशंका में स्कूल बंद कर दिए गए और एयरस्पेस भी अस्थायी रूप से बंद किया गया। इस्राइली सेना, यानी आईडीएफ ने मिसाइल व ड्रोन हमले की चेतावनी भी जारी की है। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि धमाकों में से एक विस्फोट ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के कार्यालय के पास हुआ। यह स्पष्ट नहीं है कि उस समय वे वहाँ मौजूद थे या नहीं। रिपोर्टों के अनुसार राष्ट्रपति कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद परिसर और ईरान के अर्धसैनिक संगठन इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के खुफिया मुख्यालय को भी निशाना बनाया गया। हमले की पहली खबर सुबह लगभग 11:30 बजे सामने आई। इसके बाद सेना ने अलर्ट जारी कर नागरिकों को शेल्टर के पास रहने की सलाह दी। ईरान में शनिवार कार्यदिवस होने के कारण कई सरकारी कार्यालय खुले थे, जिससे आम नागरिकों के प्रभावित होने की आशंका जताई गई।
किन शहरों में हुए हमले
अंतरराष्ट्रीय मीडिया, जैसे द न्यूयॉर्क टाइम्स और रॉयटर्स के अनुसार हमले मुख्यतः तेहरान और आसपास केंद्रित रहे, जबकि अन्य शहरों क़ोम, इस्फहान, करमनशाह, कराज और लोरेस्तान में भी विस्फोट की खबरें हैं। सैटेलाइट तस्वीरों में कई संवेदनशील परिसरों के पास धुआँ उठता दिखाई दिया।
क्षेत्रीय असर और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के संकेत हैं। अल जज़ीरा के अनुसार ईरान ने जवाबी कार्रवाई में खाड़ी देशों कतर, सऊदी अरब, कुवैत और यूएई स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की। हालात को देखते हुए इराक सहित कई देशों ने अपना एयरस्पेस बंद कर दिया।
अमेरिकी बयान और राजनीतिक घटनाक्रम
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि कार्रवाई का उद्देश्य ईरानी शासन से उत्पन्न खतरे को समाप्त कर अमेरिकी नागरिकों और सैन्य ठिकानों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हमले से पहले उनके सहयोगी स्टीव विटकॉफ और दामाद जैरेड कुशनर ने जेनेवा में ईरानी अधिकारियों से वार्ता की थी, लेकिन बातचीत बेनतीजा रही। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि अमेरिकी सीनेटर मार्को रूबियो जल्द इस्राइल का दौरा कर सकते हैं।





