
अमेरिका और इस्राइल के हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने के बाद देश में नए नेतृत्व को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संभावित सत्ता परिवर्तन पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने कहा कि जिन नामों पर पहले विचार किया जा रहा था, वे अब जीवित नहीं हैं। मंगलवार को ओवल ऑफिस में मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने संकेत दिया कि यदि अमेरिका और इस्राइल का ईरान के खिलाफ चल रहा अभियान समाप्त होता है, तो सत्ता संभालने के लिए ईरान की मौजूदा व्यवस्था के भीतर से ही किसी व्यक्ति का आगे आना अधिक उपयुक्त होगा। उनके अनुसार, आंतरिक ढांचे से नेतृत्व उभरने पर देश में स्थिरता बनाए रखना आसान होगा।
रजा पहलवी पर ट्रंप का रुख
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि उनकी प्रशासन फिलहाल निर्वासन में रह रहे किसी नेता को ईरान की कमान सौंपने के पक्ष में गंभीरता से विचार नहीं कर रही है। उन्होंने विशेष रूप से रजा पहलवी का उल्लेख करते हुए कहा कि यद्यपि वे एक अच्छे व्यक्ति प्रतीत होते हैं और कुछ वर्गों में लोकप्रिय भी हैं, लेकिन उन्हें संभावित शासक के रूप में प्रशासन ने प्राथमिकता नहीं दी है। रजा पहलवी ईरान के अंतिम शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी के पुत्र हैं और लंबे समय से देश से बाहर रह रहे हैं। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में अमेरिका और इस्राइल की संयुक्त कार्रवाई को लेकर तनाव चरम पर है। उनका मानना है कि यदि सत्ता परिवर्तन होता है, तो वह ईरान की मौजूदा सत्ता संरचना के भीतर से होना चाहिए, ताकि हालात नियंत्रण में रहें और व्यापक अस्थिरता से बचा जा सके। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभी किसी नाम पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है और फिलहाल प्रशासन का ध्यान सैन्य एवं रणनीतिक लक्ष्यों पर केंद्रित है।
इस्लामी क्रांति के बाद दूसरी बार सर्वोच्च नेता का चयन
ईरान में 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद यह केवल दूसरी बार है जब नए सर्वोच्च नेता के चयन की स्थिति बनी है। खामेनेई ने लगभग 37 वर्षों तक देश का नेतृत्व किया। अब संभावित उत्तराधिकारियों में कट्टरपंथी नेताओं से लेकर सुधारवादी धड़े तक के नाम सामने आ रहे हैं, कुछ पश्चिम के साथ टकराव की नीति के पक्षधर हैं, तो कुछ कूटनीतिक संवाद को प्राथमिकता देने की वकालत कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि ईरान में राजनीतिक बदलाव किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्या मौजूदा सत्ता संरचना में व्यापक परिवर्तन देखने को मिल सकता है।




