ईरान में युद्ध; तेहरान और उर्मिया में फंसे भारतीय छात्र, परिजनों की बढ़ी चिंता

ईरान में जारी युद्ध जैसे हालात के बीच वहां पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों के परिवारों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। इस्राइल-अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और बमबारी की खबरों ने परिजनों को बेचैन कर दिया है। अभिभावक सोशल मीडिया, टीवी और अखबारों के जरिए हालात पर नजर बनाए हुए हैं और हर पल अपने बच्चों से संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं। परिजनों का कहना है कि बमबारी की खबरें उन्हें अंदर तक झकझोर रही हैं। फोन और इंटरनेट सेवाएं बाधित होने के कारण बच्चों से संपर्क करना भी मुश्किल हो रहा है। हालांकि, बातचीत होने पर वे अपने बच्चों का हौसला बढ़ाते हैं और उनकी सलामती की दुआ करते हैं। सभी अभिभावकों को केंद्र सरकार पर भरोसा है कि संकट की इस घड़ी में उनके बच्चों को सुरक्षित स्वदेश वापस लाया जाएगा।

जामिया नगर निवासी कमर अब्बास ने बताया कि उनके 28 वर्षीय बेटे सलमान रजा वर्ष 2019 से ईरान के कोम शहर में पढ़ाई कर रहे हैं। हाल ही में इस्राइल और अमेरिका द्वारा ईरान पर बमबारी की खबर के बाद परिवार की चिंता बढ़ गई। शुरुआत में सलमान से संपर्क नहीं हो सका, जिससे परिजन बेहद परेशान रहे। बाद में संपर्क होने पर सलमान ने बताया कि चारों ओर धमाकों की आवाजें सुनाई दे रही हैं, लोग दहशत में इधर-उधर भाग रहे हैं और इंटरनेट सेवा रुक-रुक कर चल रही है। प्रशासन ने सभी छात्रों को हॉस्टल के अंदर ही रहने के निर्देश दिए हैं। ओखला विहार निवासी मौलाना कमर हुसैन के बेटे मुर्तुजा करीब छह वर्ष पहले कोम में इस्लामिक शिक्षा के लिए गए थे। जंग की स्थिति में संचार व्यवस्था बाधित होने से कई बार संपर्क नहीं हो पाया। बाद में बेटे से बात होने पर उन्होंने परिवार को आश्वस्त किया कि स्थानीय लोग उनका सहयोग कर रहे हैं और हालात के बावजूद दोस्त उनके साथ खड़े हैं। त्रिलोकपुरी की रहने वाली हुस्ना खान की बेटी मरियम 12वीं के बाद उर्मिया शहर में मेडिकल की पढ़ाई कर रही है। मौजूदा हालात को लेकर मां की चिंता साफ झलकती है। संपर्क होने पर वह बेटी को हिम्मत बनाए रखने की सलाह देती हैं। उन्हें विश्वास है कि सरकार उनकी बेटी को सुरक्षित देश वापस लाएगी।

मूल रूप से नाला सोपारा, मुंबई के निवासी डॉक्टर अली के बेटे मोहम्मद आसिफ अली तेहरान में डॉक्टर बनने का सपना पूरा करने के लिए पढ़ाई कर रहे हैं। परीक्षा के कारण वह रमजान में घर नहीं आ सके थे। युद्ध की खबर मिलते ही परिवार की चिंता बढ़ गई। 24 घंटे बाद जब बेटे से संपर्क हुआ तो परिवार ने राहत की सांस ली। डॉक्टर अली ने बताया कि उन्होंने ईरान स्थित दूतावास को ईमेल भेजा है और भारतीय दूतावास से भी बेटे की सुरक्षित वापसी के लिए मदद मांगी है। संकट के इस दौर में ईरान में रह रहे भारतीय छात्रों के परिजन दुआओं और उम्मीद के सहारे दिन गुजार रहे हैं। उनका भरोसा है कि सरकार समय रहते प्रभावी कदम उठाकर उनके बच्चों को सकुशल वतन वापस लाएगी।

विशिखा मीडिया

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