
30 साल की सजा के बाद शुरू होगी उम्रकैद
केरल में डॉक्टर वंदना दास की निर्मम हत्या के मामले में अदालत ने अहम फैसला सुनाते हुए दोषी जी. संदीप को उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोल्लम के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने यह निर्णय सुनाया। पेशे से शिक्षक संदीप को पुलिस इलाज के लिए कोट्टारक्कारा के तालुक अस्पताल लेकर गई थी, जहां उसने खुद 112 नंबर पर कॉल कर अपनी जान को खतरा बताया था। घायल अवस्था में अस्पताल लाए जाने के बाद ड्रेसिंग रूम में वह अचानक हिंसक हो गया। अदालत के फैसले की खास बात यह है कि संदीप को पहले अन्य मामलों में 30 साल की सजा काटनी होगी, जिसके बाद ही उसकी उम्रकैद की सजा लागू होगी। यह घटना साल 2023 की है, जिसने केरल ही नहीं बल्कि पूरे देश के चिकित्सा समुदाय को झकझोर दिया था। पुलिस संदीप को इलाज के लिए अस्पताल लाई थी, लेकिन वहां वह अचानक आक्रामक हो गया। उसने ड्रेसिंग रूम में रखी सर्जिकल कैंची को हथियार बनाकर हमला शुरू कर दिया। सबसे पहले उसने साथ आए पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। इस दौरान ड्यूटी पर मौजूद युवा डॉक्टर वंदना दास बच नहीं सकीं। संदीप ने उन पर कई बार हमला किया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गईं। उन्हें तुरंत तिरुवनंतपुरम के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
अदालत की अहम टिप्पणियां
विशेष लोक अभियोजक प्रताप जी. पडिक्कल के अनुसार, कोर्ट ने संदीप को हत्या, साक्ष्य मिटाने और अवैध रूप से रोकने सहित आईपीसी की विभिन्न धाराओं में दोषी पाया है। साथ ही उसे ‘केरल हेल्थकेयर सर्विस पर्सन्स एंड हेल्थकेयर इंस्टिट्यूशंस एक्ट, 2012’ के तहत भी दोषी करार दिया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि सजा इतनी सख्त होनी चाहिए, जिससे समाज में एक सशक्त संदेश जाए। आदेश के मुताबिक, संदीप पहले 30 साल की सजा पूरी करेगा, जो उसके अन्य अपराधों के लिए है, और उसके बाद उम्रकैद की सजा शुरू होगी।
एक उज्ज्वल भविष्य का दुखद अंत
डॉक्टर वंदना दास कोट्टायम जिले के कडुथुरुथी की निवासी थीं और अपने माता-पिता की इकलौती संतान थीं। वे अजीजिया मेडिकल कॉलेज अस्पताल में हाउस सर्जन के रूप में प्रशिक्षण ले रही थीं और उसी दौरान तालुक अस्पताल में सेवाएं दे रही थीं। उनकी असामयिक मौत के बाद केरल में डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे।






