
दलाल एवं डॉक्टर दंपती समेत 10 लोग हिरासत में
कानपुर में सामने आए किडनी रैकेट ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच के दौरान एक अवैध अस्पताल और पहले से बंद पड़े अस्पताल में डोनर मिलने से हड़कंप मच गया। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क में दिल्ली, मुंबई और लखनऊ से आने वाले सर्जनों के साथ-साथ 22 साल पुराने आरोपियों की भूमिका भी खंगाल रही है। मामले में जिन तीन निजी अस्पतालों के नाम सामने आए हैं, उनमें से एक बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित पाया गया। यह खुलासा तब हुआ जब पुलिस के साथ स्वास्थ्य विभाग की टीम जांच के लिए पहुंची। विभाग के मुताबिक 50 से अधिक अस्पताल जांच के दायरे में हैं और देर रात तक संयुक्त टीमें छानबीन में जुटी रहीं। सोमवार को एसीएमओ डॉ. रमित रस्तोगी और सीएचसी प्रभारी डॉ. राजेश सिंह की टीम ने संबंधित अस्पतालों का निरीक्षण किया। अधिकारियों का कहना है कि कई वरिष्ठ डॉक्टरों से पूछताछ हो सकती है, जिनमें कुछ बड़े चिकित्सा संस्थानों से जुड़े हैं। जांच में यह भी सामने आया कि जिन अस्पतालों के नाम सामने आए हैं, वहां सामान्य ऑपरेशन की भी पर्याप्त सुविधा नहीं है और किडनी ट्रांसप्लांट के लिए बाहरी विशेषज्ञों को बुलाया जाता था।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, ट्रांसप्लांट के लिए लखनऊ, दिल्ली और मुंबई से नेफ्रोलॉजिस्ट, ट्रांसप्लांट सर्जन, यूरोलॉजिस्ट और अन्य विशेषज्ञों की टीम बुलाई जाती थी, जिसमें एनेस्थेटिस्ट और डाइटिशियन भी शामिल होते थे। पुलिस ने इस मामले में पांडुनगर निवासी डॉ. इंदरजीत सिंह, उनके भाई सुरजीत सिंह आहूजा, डॉ. प्रीति आहूजा समेत कई लोगों से पूछताछ की है। आहूजा अस्पताल को इसी परिवार से जुड़ा बताया जा रहा है। जांच के दौरान आवास विकास स्थित एक बंद हो चुके अस्पताल में भी किडनी डोनर भर्ती मिला, जिससे मामले ने और तूल पकड़ लिया। पुलिस ने डोनर और रिसीवर दोनों को स्वास्थ्य परीक्षण के लिए सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया है। छापेमारी की खबर फैलते ही कई निजी अस्पतालों में अफरातफरी मच गई। कई जगहों पर अस्पतालों की लाइटें तक बंद कर दी गईं ताकि वे बाहर से बंद दिखें। सोमवार रात पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने प्रिया हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर, आहूजा हॉस्पिटल और मेडलाइफ हॉस्पिटल समेत तीन स्थानों पर छापेमारी की। इस कार्रवाई में दलाल, अस्पताल संचालक और डॉक्टर दंपती सहित 10 लोगों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर रही है और अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है।
इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश तब हुआ जब डोनर को तय रकम में से 50 हजार रुपये कम मिलने पर उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। जांच आगे बढ़ी तो किडनी रैकेट की परतें खुलती चली गईं। मामले का खुलासा कल्याणपुर इलाके से हुआ, जहां उत्तराखंड के एक युवक से करीब 10 लाख रुपये में किडनी खरीदने का सौदा किया गया। बाद में उसी किडनी को एक मरीज को 90 लाख रुपये से अधिक में बेच दिया गया। आरोप है कि दलाल शिवम अग्रवाल ने युवक को छह लाख नकद और 3.5 लाख रुपये का चेक देकर किडनी निकलवाई।






