
2 घंटे तक समुद्र में उड़ाई मिसाइलें
उत्तर कोरिया ने एक बार फिर अपनी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन करते हुए आधुनिक हथियारों का परीक्षण किया है। इस बार देश ने समुद्र में एक उन्नत युद्धपोत से क्रूज और एंटी-शिप मिसाइलों का सफल प्रक्षेपण कर अपनी नौसैनिक ताकत का परिचय दिया। खास बात यह रही कि ये परीक्षण पारंपरिक जमीन आधारित लॉन्च साइट से नहीं, बल्कि एक अत्याधुनिक युद्धपोत से किए गए, जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब वैश्विक स्तर पर अमेरिका, ईरान और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में पहले से ही तनाव चरम पर है। उत्तर कोरिया की सरकारी मीडिया के मुताबिक, यह परीक्षण रविवार को किया गया था, जिसकी जानकारी मंगलवार को सार्वजनिक की गई। इस दौरान दो रणनीतिक क्रूज मिसाइलें और एक एंटी-शिप मिसाइल दागी गईं। रिपोर्ट के अनुसार, क्रूज मिसाइलें दो घंटे से अधिक समय तक हवा में रहीं, जबकि एंटी-शिप मिसाइल ने लगभग 33 मिनट तक उड़ान भरी। सभी मिसाइलों ने अपने तय लक्ष्यों को सटीकता से निशाना बनाया। ये परीक्षण ‘चोए ह्योन’ नामक 5,000 टन वजनी विध्वंसक युद्धपोत (डिस्ट्रॉयर) से किए गए, जिसे उत्तर कोरिया की नौसेना की नई पीढ़ी का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
पूरे सैन्य परीक्षण की निगरानी खुद देश के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन ने की। उन्होंने मौके पर मौजूद रहकर मिसाइल लॉन्चिंग का जायजा लिया और नए युद्धपोतों तथा हथियार प्रणालियों के विकास से जुड़ी जानकारी भी हासिल की। सरकारी मीडिया के अनुसार, किम जोंग उन ने देश की बढ़ती नौसैनिक और परमाणु क्षमताओं पर संतोष जताया और स्पष्ट किया कि उत्तर कोरिया के लिए अपनी परमाणु शक्ति को और अधिक मजबूत करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। ‘चोए ह्योन’ युद्धपोत के अलावा, उत्तर कोरिया दो और उन्नत जहाजों का निर्माण कर रहा है, जिन्हें फिलहाल नंबर 3 और नंबर 4 के नाम से जाना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल देश की समुद्री रणनीति में बड़े बदलाव का संकेत है। इससे यह स्पष्ट होता है कि उत्तर कोरिया अब केवल जमीन आधारित मिसाइल प्रणालियों पर निर्भर नहीं रहना चाहता, बल्कि समुद्री प्लेटफॉर्म को भी अपनी सैन्य ताकत का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहा है।
विश्लेषकों के अनुसार, इस परीक्षण को सिर्फ एक सैन्य अभ्यास के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे एक व्यापक रणनीतिक संदेश के तौर पर समझा जा रहा है। माना जा रहा है कि इसके जरिए अमेरिका को स्पष्ट संकेत देने की कोशिश की गई है कि किसी भी संभावित संघर्ष की स्थिति में उत्तर कोरिया की प्रतिक्रिया पहले से कहीं अधिक घातक और अप्रत्याशित हो सकती है।






