नेपाल में सरकार द्वारा भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाने के फैसले के खिलाफ सोमवार को काठमांडू में युवाओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। जेनरेशन ज़ेड के बड़ी संख्या में युवाओं ने सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ नारे लगाए। देखते ही देखते प्रदर्शन हिंसक हो गया, जिसके चलते पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और भीड़ को काबू में करने के लिए आंसू गैस के गोले दागने पड़े।
सरकार के खिलाफ बढ़ते आक्रोश के बीच प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन में घुसने की भी कोशिश की। सुरक्षाबलों के रोकने पर स्थिति और बिगड़ गई और प्रदर्शनकारी बैरिकेड तोड़कर इधर-उधर भागने लगे। इस दौरान पुलिस पर पथराव भी किया गया। हालात नियंत्रण से बाहर होते देख सुरक्षाबलों ने पानी की बौछार और कुछ जगहों पर फायरिंग भी की। स्थानीय मीडिया के अनुसार, इस हिंसा में अब तक 16 लोगों की मौत और 42 के घायल होने की पुष्टि हुई है। काठमांडू के न्यू बानेश्वर और झापा जिले के दमक में सबसे ज्यादा तनावपूर्ण हालात बने हुए हैं।
‘द हिमालयन टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, न्यू बानेश्वर में गोली लगने से घायल एक प्रदर्शनकारी की इलाज के दौरान मौत हो गई। कई घायलों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। दमक में प्रदर्शनकारियों ने चौक से नगरपालिका कार्यालय की ओर मार्च किया और प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का पुतला जलाया। स्थिति को संभालने के लिए सेना को तैनात करना पड़ा है।
घायल प्रदर्शनकारियों का इलाज एवरेस्ट और सिविल अस्पताल सहित कई अन्य अस्पतालों में चल रहा है। ‘हामी नेपाल’ संगठन ने मैतीघर में प्राथमिक उपचार शिविर भी लगाया है।
बताया गया कि यह प्रदर्शन ‘हामी नेपाल’ के बैनर तले आयोजित किया गया था, जिसकी अनुमति पहले से ली गई थी। संगठन के अध्यक्ष सुधन गुरुंग ने कहा कि यह आंदोलन सरकारी नीतियों और भ्रष्टाचार के खिलाफ है और देशभर में इसी तरह के विरोध हो रहे हैं।
सोशल मीडिया पर क्यों लगा बैन?
सरकार ने सभी सोशल मीडिया कंपनियों को 28 अगस्त से सात दिनों के भीतर पंजीकरण कराने का आदेश दिया था। लेकिन समय सीमा खत्म होने तक मेटा (फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप), यूट्यूब, एक्स (ट्विटर), रेडिट और लिंक्डइन जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स ने पंजीकरण नहीं कराया। इसके बाद सरकार ने इन पर प्रतिबंध लगा दिया।
सरकार का आरोप है कि फर्जी अकाउंट्स और यूजर्स इन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल नफरत फैलाने, अफवाहें फैलाने और साइबर अपराधों के लिए कर रहे थे, जिससे समाज में अस्थिरता और असामाजिक गतिविधियां बढ़ रही थीं।






