आरएसएस के अनुसार हिंदू कोई धर्म नहीं, बल्कि एक सभ्यतागत पहचान-होसबाले

आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा है कि ‘हिंदू’ किसी धर्म का नाम नहीं, बल्कि एक सभ्यतागत पहचान है। उनका मानना है कि पड़ोसी देशों के साथ पैदा होने वाले तनाव की जड़ राजनीति, इतिहास की गलत व्याख्या और आपसी विश्वास की कमी में है, जिसे संवाद और सहयोग के जरिए दूर किया जा सकता है। अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में आयोजित एक कार्यक्रम में होसबाले ने भारत, उसकी सांस्कृतिक विरासत, पड़ोसी देशों के साथ संबंधों और वैश्विक परिदृश्य पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरएसएस की सोच धर्म आधारित नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और मूल्यों पर आधारित है। उनके अनुसार, संगठन हमेशा व्यापक सांस्कृतिक पहचान की बात करता है, न कि किसी एक धर्म विशेष की। उन्होंने कहा कि भारत और उसके पड़ोसी देशों के बीच समय-समय पर तनाव देखने को मिलता रहा है। इसके पीछे राजनीतिक कारणों के साथ-साथ इतिहास की गलत समझ और आपसी भरोसे की कमी जिम्मेदार रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि निरंतर संवाद और सहयोग से इन चुनौतियों को कम किया जा सकता है। साथ ही, उन्होंने संकेत दिया कि एक पड़ोसी देश के साथ संबंधों में अधिक जटिलताएं हैं, जिनमें बाहरी शक्तियों की भूमिका भी रही है, जिससे विश्वास का माहौल प्रभावित हुआ है।

भारत-अमेरिका संबंधों पर अपनी बात रखते हुए होसबाले ने कहा कि दोनों देशों को मजबूत साझेदारी के लिए पारस्परिक विश्वास और समान अवसर के सिद्धांत पर आगे बढ़ना होगा। उन्होंने ‘पीपल-टू-पीपल कनेक्ट’ को भी रिश्तों की मजबूती के लिए अहम बताया। आधुनिकता और संस्कृति के संबंध पर उन्होंने कहा कि दोनों के बीच कोई टकराव नहीं है, बल्कि ये साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एशियाई समाजों में लंबे समय से यह संतुलन देखा जाता रहा है। ‘सनातन’ को उन्होंने एक ऐसी परंपरा बताया, जो हमेशा से मौजूद है और समय के साथ विकसित होती रहती है।

आरएसएस पर लगने वाले हिंदू श्रेष्ठतावाद के आरोपों को खारिज करते हुए होसबाले ने कहा कि हिंदू विचारधारा सभी में एकता और समरसता देखने की बात करती है। उन्होंने दावा किया कि इतिहास में हिंदुओं ने न तो किसी देश पर आक्रमण किया और न ही किसी को गुलाम बनाया, इसलिए उन्हें किसी तरह की माफी मांगने की आवश्यकता नहीं है। समग्र रूप से, होसबाले ने इस बात पर जोर दिया कि आरएसएस अपनी विचारधारा को सांस्कृतिक और समावेशी रूप में प्रस्तुत करता है और भारत की वैश्विक भूमिका को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।

विशिखा मीडिया

विशिखा ने जनवरी 2019 से राजस्थान की राजधानी जयपुर से हिंदी मासिक पत्रिका के रूप में अपनी नींव रखी। राजस्थान में सफलता का परचम फहराने के बाद विशिखा प्रबंधन ने अप्रैल 2021 से उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से मासिक पत्रिका के रूप में अपना प्रकाशन आरम्भ करने का निर्णय लिया। इसी बीच लोगों की प्रतिक्रियाएं आईं कि विशिखा का प्रकाशन दैनिक समाचार पत्र के रूप में भी होना चाहिये। पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए विशिखा प्रबंधन ने 1 जनवरी 2022 से जयपुर से दैनिक समाचार पत्र के रूप में भी अपना प्रकाशन आरम्भ किया। विशिखा में प्रमुख रूप से राजनैतिक गतिविधियों सहित, कला, समाज, पर्यटन, एवं अन्य विषयों से संबंधित विस्तृत आलेख प्रकाशित होते हैं। विशिखा पत्रिका ने अपने विस्तृत आलेखों और दैनिक न्यूज़ विश्लेषण के माध्यम से अपने पाठकों को जानकारी और ज्ञान की दुनिया में ले जाने का महत्वपूर्ण काम किया है। अपनी सटीक खबरों, विस्तृत रिपोर्टों और विशेष विषयों पर आधारित लेखों के साथ, विशिखा ने लगातार अपनी विश्वसनीयता बनायी हुई है। विशिखा मासिक पत्रिका की खबरों की गुणवत्ता, नवीनता और सटीकता को ध्यान में रखते हुए इस पत्रिका ने अपने पाठकों का दिल जीता है। यह पत्रिका न केवल जानकारी उपलब्ध कराती है, बल्कि लोगों के बीच अपने विचारों के आदान प्रदान के लिए एक मंच भी उपलब्ध करती है। इसके लेखक, संपादक और टीम का प्रयास निरंतर यह होता है कि पाठकों को एक अच्छा अनुभव देने के साथ-साथ सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक मुद्दों के साथ-साथ समस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित करें। विशिखा का लक्ष्य आपको विभिन्न विषयों पर अद्भुत लेखों से परिचित कराना है। पत्रिका के माध्यम से हम लेखकों, संगठनों, एवं समाज के प्रतिष्ठित और सामान्य लोगों को उनकी रचनात्मक योग्यताओं के आधार पर साझा करने का प्रयास करना है। पत्रिका टीम का मूल मंत्र है- रचनात्मकता, नैतिकता और उच्चतम गुणवत्ता। विशिखा हिंदी मासिक पत्रिका है जो 2019 में शुरू हुई थी। वर्तमान में यह राजस्थान और उत्तराखंड से प्रकाशित की जाती है। इसमें विभिन्न विषयों पर लेख शामिल होते हैं जैसे कि करंट अफेयर्स, साहित्य, महिलाएं, यात्रा और अधिक। हमारी पत्रिका उन लोगों के लिए है जो ज्ञान और सूचना की तलाश में होते हैं और उन्हें उन विषयों से रुबरु कराने का एक मंच प्रदान करती हैं।

Leave a Reply

Discover more from

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading