
गुजरात में भाजपा की पकड़ मजबूत, सभी 15 नगर निगम जीते
गुजरात में स्थानीय निकाय चुनावों की मतगणना पूरी होने के साथ ही राज्य की राजनीतिक तस्वीर स्पष्ट हो गई है। 15 नगर निगमों समेत 9,000 से अधिक सीटों पर हुए इस व्यापक चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए सभी 15 नगर निगमों पर अपना कब्जा कायम कर लिया है। राज्य चुनाव आयोग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, सत्तारूढ़ भाजपा ने नगर निगमों में कुल सीटों के आधे से अधिक पर जीत दर्ज की है। विशेष रूप से मोरबी नगर निगम में पार्टी ने सभी 52 सीटों पर विजय हासिल कर एकतरफा जीत का उदाहरण पेश किया। 26 अप्रैल को हुए मतदान में 15 नगर निगमों के साथ 84 नगर पालिकाओं, 34 जिला पंचायतों और 260 तालुका पंचायतों के लिए वोट डाले गए थे। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले इन चुनावों को राज्य का बड़ा राजनीतिक सेमीफाइनल माना जा रहा था, जिसमें करीब 4.18 करोड़ मतदाताओं ने भाग लिया।
नगर निगमवार नतीजों पर नजर डालें तो अहमदाबाद में 192 में से 160 सीटें भाजपा के खाते में गईं, जबकि कांग्रेस को 32 सीटें मिलीं। सूरत में भाजपा ने 120 में से 115 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस को महज एक सीट मिली और अन्य के खाते में चार सीटें गईं। वडोदरा में भाजपा को 76 में से 69 सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस छह सीटों पर सिमट गई। राजकोट में भाजपा ने 65 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस को सात सीटों से संतोष करना पड़ा। इसी तरह जामनगर में भाजपा को 56, कांग्रेस को दो और अन्य को दो सीटें मिलीं। भावनगर में भाजपा ने 44 सीटों पर कब्जा किया, जबकि कांग्रेस को आठ सीटें मिलीं। गांधीधाम, नडियाद, नवसारी, पोरबंदर, मेहसाणा, मोरबी, वापी और सुरेंद्रनगर जैसे नगर निगमों में भी भाजपा का दबदबा साफ दिखाई दिया। नडियाद, नवसारी, पोरबंदर और सुरेंद्रनगर में भाजपा ने लगभग क्लीन स्वीप किया, जबकि मोरबी में सभी 52 सीटें जीतकर पार्टी ने विपक्ष को पूरी तरह हाशिये पर धकेल दिया।
ग्रामीण निकायों में भी भाजपा ने अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी। 34 जिला पंचायतों की 1,090 सीटों में से भाजपा ने 568 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस को 77 और अन्य को 30 सीटें मिलीं। वहीं, 260 तालुका पंचायतों की 5,234 सीटों में भाजपा को 2,397 सीटें मिलीं, कांग्रेस ने 591 सीटें हासिल कीं और अन्य के खाते में 329 सीटें गईं। सूरत नगर निगम में आम आदमी पार्टी (आप) का प्रदर्शन खासा कमजोर रहा और वह चार सीटों तक सिमट गई, जबकि 2021 में उसने 27 सीटें जीती थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस जीत पर गुजरात की जनता का आभार जताते हुए कहा कि राज्य में भाजपा और जनता के बीच संबंध और मजबूत हुए हैं। उन्होंने इसे सुशासन और विकास की राजनीति की जीत बताते हुए भविष्य में और अधिक परिश्रम के साथ राज्य को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का भरोसा दिलाया।
चुनाव परिणामों के बीच दहेगाम नगरपालिका का एक परिणाम विशेष चर्चा में रहा, जहां 23 वर्षीय ऋषि दीपककुमार अमीन ने वार्ड नंबर 5 से जीत दर्ज कर सबसे युवा जनप्रतिनिधि बनने का गौरव हासिल किया। मतदान प्रतिशत की बात करें तो नगर निगमों में 55.1 फीसदी, नगर पालिकाओं में 65.53 फीसदी, जिला पंचायतों में 66.64 फीसदी और तालुका पंचायतों में 67.26 फीसदी मतदान दर्ज किया गया। नवगठित गांधीधाम नगर निगम में सबसे कम 46.03 फीसदी मतदान हुआ, जबकि वापी में सर्वाधिक 72.29 फीसदी वोटिंग दर्ज की गई। नवसारी, गांधीधाम, मोरबी, वापी, आनंद, नडियाद, मेहसाणा, पोरबंदर और सुरेंद्रनगर जैसे नौ नवगठित नगर निगमों में पहली बार चुनाव कराए गए। ये चुनाव अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण के संशोधित मानदंडों के तहत हुए, जिसके चलते कई क्षेत्रों में परिसीमन और वार्ड पुनर्गठन भी किया गया। कुल मिलाकर, इन चुनावों ने एक बार फिर गुजरात में भाजपा की राजनीतिक पकड़ को मजबूत किया है, जबकि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के लिए यह परिणाम गंभीर आत्ममंथन का संकेत देता है।





