
व्हाइट हाउस में ब्रिटेन के किंग चार्ल्स-III ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर हल्के-फुल्के अंदाज में तीखा तंज कसते हुए माहौल को हास्यपूर्ण बना दिया, लेकिन उनके शब्दों में इतिहास की गहरी परतें भी झलकती रहीं। ट्रंप के उस बयान—कि अगर अमेरिका न होता तो यूरोप आज जर्मन भाषा बोल रहा होता—का जवाब देते हुए किंग चार्ल्स ने उसी अंदाज में पलटवार किया। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि यदि ब्रिटेन न होता, तो आज अमेरिका फ्रेंच बोल रहा होता। उनके इस जवाब पर वहां मौजूद लोगों के बीच ठहाके गूंज उठे। दरअसल, यह पूरा प्रसंग इतिहास और वैश्विक शक्ति संतुलन की व्याख्या से जुड़ा है। ट्रंप का इशारा द्वितीय विश्व युद्ध की ओर था, जब नाजी जर्मनी के बढ़ते प्रभाव को रोकने में अमेरिका की महत्वपूर्ण भूमिका रही। हालांकि, किंग चार्ल्स ने इस बयान के जवाब में इतिहास का एक अलग पक्ष सामने रखा, जिसमें अमेरिका की स्वतंत्रता के दौर का जिक्र शामिल है।
1776 में जब अमेरिका ने ब्रिटेन से आजादी की घोषणा की, उस समय फ्रांस ने उसे निर्णायक सैन्य और आर्थिक सहायता प्रदान की थी। इतिहासकार मानते हैं कि फ्रांस के सहयोग के बिना अमेरिका की स्वतंत्रता कठिन हो सकती थी। इतना ही नहीं, स्वतंत्रता से पहले अमेरिका के कई क्षेत्रों पर फ्रांसीसी नियंत्रण था, जिन्हें ‘न्यू फ्रांस’ के नाम से जाना जाता था। इसके अलावा, ब्रिटेन और अमेरिका के संबंध स्वतंत्रता के बाद भी पूरी तरह सहज नहीं रहे। 1812 में दोनों देशों के बीच हुए युद्ध के दौरान ब्रिटिश सेना ने वॉशिंगटन डीसी पर कब्जा कर लिया था और 1814 में व्हाइट हाउस को आग के हवाले कर दिया था।
ऐसे में जहां ट्रंप ने द्वितीय विश्व युद्ध के संदर्भ में अमेरिका की भूमिका को रेखांकित किया, वहीं किंग चार्ल्स ने उससे पहले के ऐतिहासिक घटनाक्रमों की याद दिलाते हुए यह संकेत दिया कि इतिहास बहुआयामी होता है और हर दौर की अपनी अलग अहमियत होती है।






