हर व्यक्ति की एक पहचान होती है कोई अपने कार्यों से जाना जाता है तो कोई अपने व्यवहार से कोई अपनी खूबसूरती के कारण फेमस होता है तो कोई अपनी जुबान के कारण। लेकिन इन चीजों या इन खासियत के द्वारा हमें सरकारी पहचान नहीं मिल सकते क्योंकि यह खूबियां कई लोगों में हो सकती हैं। हमारी पहचान दिलाते हैं हमारे पहचान पत्र जिन में हमारे बारे में पूरी जानकारी होती है। यही पहचान आज के समय में आधार कार्ड के द्वारा मिली है। 12 जुलाई 2016 को आधार अधिनियम 2016 के प्रावधानों का पालन करते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा स्थापित एक वैधानिक प्राधिकरण है। यूआइडीएआइ की स्थापना भारत सरकार द्वारा जनवरी 2009 में योजना आयोग के तत्व विधान में एक संलग्न कार्यकाल के रूप में की गई थी। भारत के सभी निवासियों को 12 अंक की विशिष्ट पहचान संख्या प्रदान करने का कार्य सौंपा गया और 31 अक्टूबर 2021 तक यूआइडीएआइ ने 131.68 करोड़ आधार नंबर जारी किए। जब आधार कार्ड जारी किया जा रहा था तो उस वक्त भारत वासियों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर यह आश्वासन दिया गया था कि इस एक आधार कार्ड से सभी कार्य होंगे और इससे व्यक्ति की सुरक्षा भी बरकरार रहेगी। लेकिन समय के बदलने के साथ ही साथ यह सुरक्षा अब खतरे में बदल रही है। अभी हाल ही में एक अमेरिकी साइबर सिक्योरिटी फॉर्म ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है कि 81 करोड़ से ज्यादा भारतीयों के आधार का डाटा लीक हुआ है और इसे डार्क वेब पर बेचा जा रहा है। कहा जा रहा है कि डार्क वेब पर भारतीयों के आधार और पासपोर्ट की जानकारियां जैसे नाम फोन नंबर और एड्रेस जैसी जानकारी बेची जा रही है। इस खबर ने पूरे भारत को चिंता में डाल दिया है।
रिपोर्ट में क्या क्या कहा गया
रीसिक्योरिटी रिपोर्ट में कहा की अक्टूबर की शुरुआत में उनके हंटर यूनिट को डार्क वेब पर लाखों पर्सनल आईडेंटिफाइबल इनफार्मेशन रिकॉर्ड मिले थे। जिनमें भारतीय नागरिकों के आधार कार्ड भी थे जो बिक रहे हैं। फर्म ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि 9 अक्टूबर को pwn00001 नाम से एक थ्रेड एक्टर ने ब्रिज फोरम पर एक थ्रेड पोस्ट किया जिसमें दिखाया गया था कि 815 मिलियन भारतीय के आधार और पासपोर्ट रिकॉर्ड का एक्सेस था इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि हंटर के जांच कर्ताओं ने जब थ्रेड एक्टर से कांटेक्ट किया तो वह पूरा आदर और पासपोर्ट डाटा 80000 डॉलर में बेचने को तैयार थे। रिपोर्ट के मुताबिक pwn00001 भारतीयों के कई डाटा सेट को बेच रहा था जिसमें फील्ड नाम पिता का नाम फोन नंबर पासपोर्ट नंबर आधार नंबर उम्र लिंक एड्रेस जिला पिन कोड और राज्य का नाम था इसमें और भी जानकारियां हो सकती थी। रिपोर्ट में बताया गया कि pwn00001 ने चार स्प्रेडशीट शेयर किए थे जिसमें हंटर एनालिस्ट को आधार डाटा का प्रूफ मिला जो वेरीफाई आधार फीचर देने वाली एक सरकारी पोर्टल से संबंधित है। इस खबर ने पूरे भारत में चिंता बढ़ा दिया साथ ही यह सवाल भी खड़े कर रहा है कि अब भारतीयों के पर्सनल डाटा लीक होने के बाद उसे कैसे रोका जायेगा। डाटा ब्रिज के मामले नए नहीं है। इसके पहले भी कई बार डार्क वेब या साइबर क्राइम से जुड़े कई मामले देखे जा चुके हैं। कॉविड-19 के समय एम्स जैसे अस्पतालों से मरीज के डाटा को हैक करने के मामले भी देखे जा चुके हैं। लेकिन सवाल यह है कि आखिर इन डाटा ब्रिज के मामलों से कैसे बचा जाए?
UIDAI ने दी थी चेतावनी
UIDAI ने आम जनता को किसी भी संगठन के साथ अपने आधार की फोटो कॉपी साझा नहीं करने की चेतावनी दी थी क्योंकि इसका दुरुपयोग किया जा सकता है। इसके स्थान पर मार्क्स आधार का उपयोग करने की सिफारिश की जो आधार संख्या के केवल अंतिम चार अंक प्रदर्शित करता है। इसे जनता से अपने ही आधार को डाउनलोड करने के लिए सार्वजनिक कंप्यूटरों का उपयोग करने से बचने के लिए भी कहा उसे स्थिति में उन्हें इस की डाउनलोड की गई प्रशन को स्थाई रूप से हटाने के लिए कहा गया था। केवल वे संगठन जिन्होंने यूआइडीएआइ से उपयोगकर्ता लाइसेंस प्राप्त किया है वह किसी व्यक्ति की पहचान स्थापित करने के लिए आधार का उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा आधार अधिनियम के कारण होटल और मूवी थिएटर को आधार कार्ड के प्रति या एकत्र करने या बनाए रखने की अनुमति नहीं है। देश में कई निजी संस्थाएं आधार कार्ड पर जोर देती हैं और उपभोग करता अक्सर विवरण साझा करते हैं इसके बारे में कोई स्पष्ट नहीं है कि यह संस्थाएं कैसे इन डाटा को निजी और सुरक्षित रखते हैं। कॉविड-19 के समय परीक्षण करवाने के लिए भी आधार कार्ड का डाटा मांगा जा रहा था और लोगों ने अधिक से अधिक मात्रा में अपने सभी जानकारियां अस्पतालों व प्रयोगशालाओं में प्रदान कर दी, और फिर उसके बाद आधार कार्ड के डाटा के लीक होने की खबरें आए दिन आने लगीं। वर्ष 2018 में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय सुनाया के आधार प्रमाणीकरण को केवल भारत के समेकित कोष से भुगतान किए गए लाभों के लिए अनिवार्य बनाया जा सकता है और आधार के सफल होने पर पहचान सत्यापन के वैकल्पिक साधन हमेशा प्रदान किए जाने चाहिए। बच्चों को छूट दी गई थी लेकिन आंगनबाड़ी सेवाओं या स्कूल में नामांकन जैसे बुनियादी अधिकारों के लिए बच्चों के नियमित रूप से आधार की मांग की जाती रही है फूल स्टाफ केंद्र और राज्य सरकारों ने आधार के साथ कल्याणकारी लाभों के जुड़ाव को लागू करने के लिए अल्टीमेट पद्धति का नियमित उपयोग किया इस पद्धति में यदि प्राप्तकर्ता सही समय में लिंकेज निर्देशों का पालन करने में विफल रहता है जैसे कि अपने जॉब कार्ड राशन कार्ड या बैंक खाते का आधार से लिंक करने में सफल होने पर लाभ को वापस ले लिया जाता है या निलंबित कर दिया जाता है।
आधार का महत्त्व
पारदर्शिता और सुशासन को बढ़ावा देने के लिए आधार नंबर ऑनलाइन एवं किफायती तरीकों से सत्यापन योग्य है। या डुप्लीकेट और नकली पहचान को खत्म करने में अर्थ विद्या है तथा इसका उपयोग कई सरकारी कल्याण सेवाओं का लाभ प्राप्त करने हेतु किया जाता है जिससे कि पारदर्शिता एवं सुशासन को बढ़ावा मिलता है। आधार ने बड़ी संख्या में ऐसे लोगों को पहचान प्रदान की है जिसकी पहले कोई पहचान नहीं थे इसका उपयोग कई प्रकार की सेवाओं में किया गया तथा इसने वित्तीय समावेशन ब्रॉडबैंड और दूरसंचार सेवाओं नागरिकों के बैंक खाते में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण में पारदर्शिता लाने में भी मदद की। आधार संख्या किसी भी जाति धर्म आए स्वास्थ्य और भूगोल के आधार पर लोगों को वर्गीकृत नहीं करते आधार संख्या पहचान का प्रमाण है हालांकि आधार संख्या इसके धारक को नागरिकता या अधिवास का कोई अधिकार प्रदान नहीं करती है। आधार सामाजिक एवं वित्तीय समावेशन सार्वजनिक क्षेत्र के सुविधाओं के पहुंच में सुधारो वित्तीय बजातो के प्रबंध सुविधा बढ़ाने और समस्या मुक्त जान केंद्रित शासन को बढ़ावा देने के लिए एक रणनीतिक नीति उपकरण है। आधार को स्थाई वित्तीय पेट के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है यह समाज के वंचित और कमजोर वर्गों के वित्तीय समावेशन की सुविधा प्रदान करता है अतः न्याय और समानता का एक उपकरण है इस प्रकार आदर पहचान मंच डिजिटल इंडिया के प्रमुख स्तंभों में से एक है। आधार को काफी दूर और बड़े सोच के साथ सरकार ने जनता के समक्ष पेश किया था लेकिन अब यही आधार जिम बायोमेट्रिक तक शामिल होते हैं वह अब मनुष्य को खतरे में डाल रहे हैं। कई मामलों में तो मृत्यु लोगों के आधार कार्ड का इस्तेमाल कर कई प्रकार के कार्यों को अंजाम दिया जा रहा है। अब जल्द ही इस से निपटने व इसका परमानेंट इलाज करने की जरूरत है।अब तो बस देखना यह है कि सरकार अपनी जनता की सुरक्षा के लिए कौन-कौन से कदम उठा सकती है और इस डाटा ब्रिज से बचने के लिए सरकार ने आगे की क्या प्लानिंग की है।




