कार्य के प्रति प्रेम व निष्ठा

कार्य के प्रति प्रेम व निष्ठा के कई उदाहरण देखने को मिल सकते हैं। अपने काम से प्यार करने वाले व अपने कर्तव्यों के प्रति पूर्ण निष्ठा रखने वाली भारत में कई ऐसी महान हस्तियाँ हैं जिन्होने ना सिर्फ पूरे देश की आँखों में इज्ज़त कमाई बल्कि सबका प्यार भी पाया।

नीरजा भनोट, ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, जैसी बहुत सी ऐसी महान हस्तियाँ हैं, जिन्हें अपने कर्म से इतना असीम प्रेम था, कि मृत्यु ने भी उन्हें तभी गले लगाया जब वह अपने कर्म मे लीन थे, और उन्हे अमर बना दिया। 

नीरजा भनोट 

हवाई अड्डे के सुरक्षा गार्ड के रूप में तैयार हथियारों से लैस चार आतंकवादियों ने एक स्वचालित हथियार से गोलीबारी करते हुए विमान में प्रवेश किया और विमान का नियंत्रण अपने हाथों में ले लिया।

यह नीरजा भनोट की कहानी है, जो बोर्ड में वरिष्ठ फ्लाइट अटेंडेंट थीं, जिन्होनें अपहृरत विमान, पैन एम फ्लाइट 73, से कई यात्रियों को भागने में मदद की। नीरजा भनोट की 23 वें जन्मदिन से 25 घंटे पहले विमान मे तीन बच्चों को आतंकवादी फायर से बचाते हुए, हत्या कर दी गई थी।

आतंकवादियों के विमान में चढ़ने के बाद नीरजा ने कॉकपिट चालक दल को सतर्क किया, जो कॉकपिट में एक ओवरहेड हैच के माध्यम से भाग गये। आतंकवादियों में से एक ने उड़ान चालक दल को इकट्ठा करने और विमान पर सभी यात्रियों के पासपोर्ट सौंपने के लिए कहा। जब नीरजा को पता चला कि आतंकवादियों का प्राथमिक निशाना अमेरिकी यात्री थे, तो उन्होनें उनके पासपोर्ट छुपा लिए, यहां तक ​​कि उनमें से कुछ को सरका कर नीचे गिरा दिया। विमान में सवार कुल 41 अमेरिकी यात्रियों में से केवल 2 मारे गए।

यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को रनवे पर 17 घंटे तक बंधक बनाए रखने के बाद, आतंकवादियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। यात्रियों को भागने में मदद करने के लिए नीरजा विमान में ही रहीं, हालांकि वह पहली बार में जा सकती थीं। 

हम शायद कभी नहीं जान सकते कि अपहरण के उन भयानक घंटों के दौरान नीरजा क्या सोच रही थीं, या क्या महसूस कर रही थीं, लेकिन हम जानते हैं, कि उन्होनें असाधारण और अदम्य साहस और धैर्य के साथ आतंकवादियों की कार्रवाई का करारा जवाब दिया। 

ए.पी.जे. अब्दुल कलाम 

आईआईएम शिलांग में एक व्याख्यान देते हुए, भारत के पूर्व राष्ट्रपति और अत्यधिक सम्मानित “मिसाइल मैन” 27 जुलाई 2015 को शाम 6:30 बजे कार्डियक अरेस्ट के कारण गिर गए। तब उन्हें बेथानी अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें 83 वर्ष की उम्र में शाम 7:45 बजे मृत घोषित कर दिया गया।

जैसे ही यह खबर सामने आई, पूरे देश ने कलाम जी की मृत्यु पर शोक व्यक्त किया, क्योंकि वह एक ऐसे लोकप्रिय व्यक्ति थे जिन्होने अपनी अविश्वसनीय उपलब्धियों और व्यक्तित्व से लाखों लोगों को प्रेरित किया।

देश के सबसे प्रिय और सम्मानित व्यक्तित्वों में से एक ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, मे बहुत सी ऐसी आश्चर्यजनक चीजें थी जिन्होंने उनको एक असाधारण व्यक्ति बनाया।

वह सादगी, दयालुता, हंसमुख मुस्कुराहट, ईमानदारी और स्पष्टता के लिए जाने जाते थे। वह बच्चों के साथ समय बिताना पसंद करते थे, क्योंकि उन्हें लगता था कि अगर वह भारत के युवाओं के दिमाग को प्रभावित कर सकते हैं, तो वे भारत के भविष्य को आकार देने में मदद कर सकते हैं।

एक ऐसा ही वाक्या है, नवंबर 2013 में हैदराबाद में एनएचआरडी नेशनल कॉन्फ्रेंस का। उन्होंने बड़े चाव से बात की, और सभी से सपने देखने का आग्रह किया। और हमेशा “लोगों की सेवा” करने के लिए एक दृष्टिकोण की पहल की। उन्होंने कहा कि एचआर सेवा देने के लिये है, न केवल कॉर्पोरेट और कॉर्पोरेट कर्मचारियों के लिए, बल्कि बड़े पैमाने पर लोगों की सेवा करने के और हमारे क्षितिज को व्यापक बनाने के लिए है। उन्होंने बहुत ही व्यंग्यात्मक टिप्पणी की, “अपने काम से प्यार करो – अपनी कंपनी से नहीं, क्योंकि आप नहीं जानते, कि कब आपकी कंपनी, आपसे प्यार करना बंद कर देगी” 

कलाम जी सिर्फ युवा वर्ग के लिए ही नहीं, अपितु कर्म, धर्म, जाति से परे हर भारतीय के लिए हमेशा से प्रेरणा के स्रोत रहे हैं।

2000 वर्षों के इतिहास में भारत पर 600 वर्षों तक अन्य लोगों ने शासन किया है। यदि आप विकास चाहते हैं, तो देश में शांति की स्थिति होना आवश्यक है। और शांति की स्थापना शक्ति से होती है। इसी कारण प्रक्षेपास्त्रों को विकसित किया गया, ताकि देश शक्ति सम्पन्न हो।अब्दुल कलाम

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