5000 साल पुराना पाकिस्तान का कटास राजमंदिर

ऐसा हिंदू मंदिर, जहां सती की याद में भोलेनाथ के गिरे थे आंसू

पाकिस्तान में स्थित कई हिंदू मंदिर जग प्रसिद्ध हैं. इन्हीं में से एक कटास राजमंदिर इन दिनों लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ है. बता दें कि इस मंदिर में सती के याद में भगवान शिव के आंसू गिरे थे और इन्हीं आसूंओं से तालाब का निर्माण हुआ था. इसे कटाक्ष कुंड के नाम से जाना जाता है. 5000 साल पुराना यह हिंदू मंदिर इन दिनों खूब चर्चा में बना हुआ है. पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के चकवाल में स्थित कटास राजमंदिर परिसर में सात या इससे ज्यादा मंदिर हैं, जिसे सतग्रह के रूप में भी जाना जाता है. मंदिर को लेकर ऐसा माना जाता है कि जिस तालाब के चारों ओर ये मंदिर बना हुआ है, वे भगवान शिव के आंसूओं से भरा है. कहते हैं कि यहां भगवान शिव अपन पत्नी के साथ रहते थे. सती की मृत्यु के बाद भगवान शिव दुख में डूब गए और अपने आंसू नहीं रोक पाए. वे सती की याद में इतना रोए कि ये तालाब उनके आंसूओं से भर गया. मंदिर में स्थित इस कुंड को कटाक्ष कुंड के नाम से जाना जाता है. कटास का अर्थ होता है आंखों से आंसू निकलना. मान्यता है कि कटास राज वह  जगह है, जहां 12 साल पांडव वनवास के दौरान रहे थे. जंगलों में घूमते हुए जब पांडवों को प्यास लगी, तो उनमें से एक पांडव कटास कुंड के पास जल लेने गए. उस समय इस कुंड पर यक्ष का अधिकार था, तब यक्ष ने सवालों का जवाब देने के बाद ही कुंड से जल लेने को कहा था. एक एक कर चारों पांडव यक्ष के सवालों का सही जवाब न दे सके और सभी वहीं मूर्छित हो गए. आखिर में वहां युधिष्ठर आए. तब उन्होंने अपनी बुद्धिमता का जवाब देते हुए, उनके सभी सवालों के सही जवाब दिए. पाकिस्तान में स्थित इस मंदिर में लगभग 900 साल पहले बने बौद्ध स्तूप, हवेलियां और मंदिर शामिल है. इनमें से ज्यादातर मंदिर भगवान शिव को समर्पित हैं, तो कुछ मंदिर भगवान श्री राम और हनुमान जी को समर्पित हैं. इतना ही नहीं, मंदिर के अंदर एक प्राचीन गुरुद्वारे के अवशेष भी मिलते हैं. इस मंदिर में गुरु नानक ने दुनिया भर में यात्रा करते समय निवास किया था. मंदिर से जुड़ी कई आस्थायें हैं, इनके चलते अलग-अलग मौकों पर हिंदू लोग इस मंदिर में एकत्रित होते हैं. खासतौर से शिवरात्रि के मौके पर यहां खूब भीड़ देखने को मिलती है. हालांकि इस समय इस मंदिर कोई मूर्ति नहीं है लेकिन फिर भी लोग यहां पांडव भाइयों के बलिदान की स्मृति में यहां आते हैं, और भगवान शिव के दुख की वंदना करते हैं. ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर के तालाब में स्नान करने मात्र से ही व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है. 

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