इंडिया गठबंधन ने कहा था कि भाजपा सरकार को 2024 लोकसभा चुनाव में वे सत्ता से उखाड़ फेंकेगे। लेकिन सीट शेयरिंग के बगैर ये नामुमकिन है। इस गठबंधन का सारा पेंच यहीं फंसा पड़ा है। हालांकि कांग्रेस ने इसके लिए एक खांका खींचा है लेकिन क्या ये दूसरे दलों को मान्य होगा?
राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ शुरू होने से पहले कांग्रेस सीट शेयरिंग के फॉर्मूले को हर हाल में सहयोगी दलों के साथ सुलझा लेना चाहती है। इसी मद्देनजर लोकसभा चुनाव 2024 के लिए कांग्रेस ने सीट शेयरिंग का एक फॉर्मूला तैयार कर लिया है, जिसके तहत वह गठबंधन के सहयोगी दलों के साथ बातचीत करेगी। कांग्रेस गठबंधन कमेटी के संयोजक मुकुल वासनिक ने देश के अलग-अलग राज्यों के पार्टी नेताओं के साथ चर्चा करके सीट शेयरिंग का खाका तैयार किया है, जहां पर कांग्रेस को चुनाव लड़ना है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और महासचिव केसी वेणुगोपाल को सीट शेयरिंग की रिपोर्ट सौंप दी गई है। ऐसे में सवाल उठता है कि कांग्रेस के द्वारा तैयार किए गए सीट शेयरिंग फॉर्मूले पर क्या अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव और उद्धव ठाकरे जैसे सहयोगी नेता रजामंदी देंगे? पहले गठबंधन कमेटी की तरफ से यूपी में कांग्रेस के लिए लोकसभा की 10 सीट तय की गई थी। लेकिन राज्य इकाई के दवाब के बाद कल यूपी के सभी नेताओं से जोन के आधार पर मजबूत सीट और नेताओं की लिस्ट मांगी गई थी। कल देर शाम तक सभी को अपना फीडबैक देने के निर्देश दिए गए थे, और आज की बैठक में यूपी में अधिक सीट मांगने का फैसला लिया गया है। आगामी लोकसभा चुनावों के लिए पार्टी के घोषणापत्र का मसौदा तैयार करने की जिम्मेदारी संभालने वाली कांग्रेस की समिति ने बृहस्पतिवार को अपनी पहली बैठक की, और दस्तावेज में शामिल किए जाने वाले विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा की। लगातार 10 साल से सत्ता पर काबिज भाजपा से सत्ता छीनने की कोशिश में जुटी कांग्रेस का लक्ष्य जनता के सामने एक वैकल्पिक सकारात्मक एजेंडा पेश करना है। समिति के अध्यक्ष पी. चिदंबरम ने बैठक के बाद कहा, “घोषणापत्र समिति की यह पहली बैठक थी। यह प्रारंभिक विचारों का आदान-प्रदान था कि हम घोषणापत्र के प्रारूप के साथ कैसे आगे बढ़ते हैं। ये अगली बैठक में तय होगा, जो अगले सप्ताह होगी।”
2024 के लोकसभा चुनावों के लिए अब तीन महीने का वक्त बचा है. सभी राजनीतिक दल आम चुनावों के लिए सीटों पर उम्मीदवारों के चयन में जुट गये हैं. इस बीच I.N.D.I.A. गठबंधन के दलों के बीच सीट शेयरिंग पर चर्चा शुरू हो गई है। जानकारी के मुताबिक कांग्रेस गठबंधन कमेटी अपनी रिपोर्ट राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को गठबंधन और सीट शेयरिंग पर रिपोर्ट सौंपेगी। कांग्रेस की अलायंस कमेटी में राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, सलमान खुर्शीद, मुकुल वासनिक और मोहन प्रकाश शामिल हैं। मुकुल वासनिक कमेटी के संयोजक हैं। खबर है कि कांग्रेस यूपी की 80 में से 25 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए दावेदारी करेगी. सूत्रों के मुताबिक पार्टी ने उन संभावित सीटों को चिह्नित कर लिया है जहां पार्टी की स्थिति मजबूत है और वह चुनाव जीत सकती हैl सूत्रों की मानें तो पार्टी की प्रदेश इकाई ने सूबे की ऐसी 25 से अधिक लोकसभा सीटों को चिह्नित कर लिया है। कांग्रेस ने सपा के साथ सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत के लिए भी फ्रेमवर्क कर लिया है। यूपी कांग्रेस के नेतृत्व के मुताबिक सपा से 30 सीटों से कम पर बात नहीं होगी। हालांकि कांग्रेस के शीर्ष नेता 25 सीटों को लेकर बात करने की बात कह रहे हैं। कांग्रेस की तैयारियां भी इसी दिशा में बढ़ती नजर आ रही हैं। 14 जनवरी को मणिपुर से शुरू होने वाली भारत जोड़ो न्याय यात्रा का रूट देखें तो उस पर भी यूपी कांग्रेस के सीट शेयरिंग फॉर्मूले की छाप नजर आ रही है। राहुल गांधी की यह यात्रा यूपी में 11 दिन रहेगी और सूबे के 20 जिलों से होकर गुजरेगी।
गौरतलब है कि यूपी में सीट शेयरिंग को लेकर कांग्रेस के यूपी प्रभारी अविनाश पांडे और सपा महासचिव रामगोपाल यादव के बीच बातचीत शुरू हो गई है। बताया जा रहा है कि जल्द ही औपचारिक बातचीत भी शुरू हो जाएगी। बता दें कि बिहार से पश्चिम बंगाल और दिल्ली से पंजाब तक इंडिया गठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर सियासी दलों के बीच बातचीत शुरू हो चुकी है। सपा के संदर्भ में सूत्रों का दावा है कि पार्टी ने फैजाबाद, कन्नौज, मैनपुरी, आजमगढ़, बदायूं, फिरोजाबाद और अंबेडकरनगर में प्रत्याशी उतारने का मन बना लिया है. एटा लोकसभा सीट पर तो अखिलेश यादव ने नवल किशोर शाक्य की उम्मीदवारी पर मुहर भी लगा दी है। दूसरी ओर यूपी में कांग्रेस अमेठी और रायबरेली समेत कई और सीटों पर अपना दावा कर रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा, कि कांग्रेस की गठबंधन कमेटी में यूपी में गठबंधन के संदर्भ में क्या प्रस्ताव किया गया है। साथ ही कांग्रेस की यूपी इकाई को इस बात का भी इंतजार है कि वह जिन सीटों पर अपना दावा ठोक रही है, क्या वह हाईकमान को मान्य होगी.





