संसद के बजट सत्र से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्षियों पर जोरदार हमला बोला है। प्रधानमंत्री ने विपक्षी सांसदों को नसीहत देते हुए कहा, ‘मुझे उम्मीद है कि जिन सांसदों को लोकतांत्रिक मूल्यों की धज्जियां उड़ाने की आदत है, वे आत्मनिरीक्षण करेंगे कि उन्होंने संसद सदस्य के रूप में अपने कार्यकाल में क्या किया। उन्होंने कहा, ‘जब चुनाव का समय निकट होता है तब पूर्ण बजट नहीं रखा जाता है, हम भी उसी परंपरा का पालन करते हुए नई सरकार बनने के बाद पूर्ण बजट आएंगे। इस बार देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कल हम सबके सामने बजट पेश करने वाली हैं। मुझे विश्वास है कि देश प्रगति की नई-नई ऊंचाइयों को पार करते हुए आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, मैं इतना जरूर कहूंगा कि जिनका आदतन हुड़दंग करने का स्वभाव बन गया है, जो आदतन लोकतांत्रिक मूल्यों का चीरहरण करते हैं, ऐसे सभी माननीय सांसद आज जब आखिरी सत्र में मिल रहे हैं, तब जरूर आत्मनिरीक्षण करेंगे कि 10 साल में उन्होंने जो किया, अपने संसदीय क्षेत्र में भी 100 लोगों से पूछ लें। किसी को याद नहीं होगा कि जिन्होंने इतना हुड़दंग किया। मैं मानता हूं कि एक बड़ा वर्ग उनके उस व्यवहार की सराहना करेंगे, जिन्होंने सकारात्मक होकर सरकार की तीखी आलोचना की। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, नए संसद भवन में आयोजित पहले सत्र के अंत में संसद ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण निर्णय लिया और वह निर्णय था- ‘नारीशक्ति वंदन अधिनियम’। 26 जनवरी को हमने देखा कि कैसे देश ने नारी शक्ति के शौर्य, पराक्रम और संकल्प को अनुभव किया। बजट सत्र की शुरुआत में आज राष्ट्रपति जी का मार्गदर्शन और कल निर्मला सीतारमण जी द्वारा अंतरिम बजट पेश किया जाएगा। एक प्रकार से यह नारी शक्ति के अहसास का पर्व है।
प्रधानमंत्री का कहना था कि विरोध का स्वर तीखा क्यों न हो, लेकिन जिसने सदन में उत्तम विचारों का लाभान्वित किया होगा, उनको बड़ा वर्ग याद करता होगा। आने वाले दिनों में भी जब सदन की चर्चाएं कोई देखेगा तो एक एक शब्द इतिहास की तारीख बनकर उजागर होगा। बता दें कि मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का यह आखिरी बजट सत्र है। सत्र की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के बाहर बयान दिया।




