राष्ट्रीय ध्वज की बिक्री में 50 फीसदी की गिरावट, लगातार बारिश बनी वजह

कर्नाटक के हुबली जिले में पिछले दो सालों में लगभग 2.2 करोड़ और 4.2 करोड़ राष्ट्रीय झंडे बनाए गए और बेचे भी गए. हालांकि, इस साल जुलाई तक केवल 97 लाख झंडों की मांग दर्ज की गई है. आखिर यह गिरावट क्यों आई है.
कर्नाटक के हुबली जिले में स्थित केकेजीएसएस यूनिट में झंडों की मांग में गिरावट आई है. कर्नाटक खादी ग्रामोद्योग संयुक्त संघ KKGSS देश की एकमात्र राष्ट्रीय ध्वज निर्माण यूनिट है, जिसे भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) से मान्यता प्राप्त है. इस यूनिट को हुबली का गौरव कहा जाता है. यह इकाई बेंगेरी में स्थित है. खराब मौसम और लगातार बारिश ने झंडों की बिक्री को प्रभावित किया है. बता दें, बेंगरी के कर्नाटक खादी ग्रामोद्योग संयुक्त संघ (KKGSS) में राष्ट्रीय ध्वज की मांग में 50 फीसदी की गिरावट आई है. इसकी वजह लगातार बारिश, खराब मौसम, बाढ़ और सड़क यातायात की समस्या है. स्वतंत्रता दिवस के अमृत महोत्सव के दौरान रिकॉर्ड लेनदेन हुआ था. हालांकि, इस बार जुलाई तक केवल 97 लाख का लेनदेन हुआ है. केंद्र के सचिव शिवानंद माथापति ने ETV भारत को यह जानकारी दी है.
उन्होंने कहा कि उत्तर भारत और दक्षिण भारत से राष्ट्रीय ध्वज की भारी मांग थी. इस साल यह बहुत कम है. आमतौर पर हर साल 3 से 3.5 करोड़ झंडे बिकते थे. हमें अगले 26 जनवरी तक 3.5 करोड़ का कारोबार होने की उम्मीद है. लेकिन, इस साल हमें बारिश, बाढ़, भूस्खलन और खराब मौसम के कारण काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. संगठन के सचिव शिवानंद मठपति ने आगे कहा कि भारतीय मानक संस्थान (बीआईएस) के अनुसार, 9 अलग-अलग साइज के झंडे तैयार किए जाते हैं. 21×14, 12×8, 9×6, 6×4, 4.5×3, 3×2, 1.5×1, 9×6 और 6×4 फीट साइज के झंडे बनाकर बेचे जाते हैं. साइज के हिसाब से इनकी कीमत 250 रुपए से लेकर 30 हजार रुपए तक होती है. झंडे के लिए कपड़े बनाने वाले करघे और सामान में पानी घुस जाने से खादी का उत्पादन धीमा हो गया है. हालांकि, बेंगरी के कर्नाटक खादी ग्रामोद्योग संयुक्त संघ के पास पिछले साल तैयार किए गए 18 लाख झंडों का स्टॉक है.
केंद्र सरकार का फैसला भी मांग में कमी का कारण
खादी विनिर्माण इकाई की कर्मचारी अन्नपूर्णा डोड्डामनी ने बताया कि आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर केंद्र सरकार ने पॉलिएस्टर और सिंथेटिक झंडे के निर्माण की अनुमति दी है. मांग में कमी का यह भी एक कारण है. उन्होंने बताया कि इसके अलावा बारिश भी एक कारण है. हम जून और जुलाई से लगातार काम कर रहे थे. इस कारण हम ओवरटाइम ड्यूटी करते थे और हमें अधिक वेतन मिलता था. इस बार मांग कम है, इसलिए यूनिट और कर्मचारियों को नुकसान हुआ है.

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