15 अगस्त को देश भर के किसान निकालेंगे ट्रैक्टर मार्च, करेंगे दिल्ली कूच

पंजाब-हरियाणा के शंभू बॉर्डर को खोलने के हाईकोर्ट के आदेश की डेडलाइन आज खत्म हो रही है। अभी तक बॉर्डर को खोलने की कोई पहल सरकार की तरफ से नहीं की गई है। हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ हरियाणा सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। वहीं फरवरी से डटे किसानों ने हाईकोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली कूच का एलान कर दिया है। संयुक्त किसान मोर्चा गैर राजनीतिक के सदस्य जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि वह शंभू सीमा खुलते ही दिल्ली के लिए कूच कर देंगे। 15 अगस्त को ट्रैक्टर मार्च निकालने का भी फैसला लिया गया है। यह ट्रैक्टर मार्च देश भर में निकाला जाएगा।
डल्लेवाल ने बताया कि उनके पास छह महीने का राशन है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की है कि उनको जंतर-मंतर या दिल्ली के रामलीला मैदान में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की अनुमति दी जानी चाहिए। अगर रास्ते में कहीं भी सरकार ने रोकने का प्रयास किया तो वे वहीं पर धरना शुरू कर देंगे। इसकी जिम्मेदारी पूरी तरह से सरकार की होगी। डल्लेवाल ने कहा कि वे यह कूच ट्रैक्टर ट्रॉलियों के साथ करेंगे, क्योंकि बारिश, गर्मी व सर्दी से बचने के लिए उनके पास एकमात्र विकल्प ट्रॉली ही होती है। उन्होंने कहा कि वे केंद्र सरकार से कोई मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि सरकार ने जो वादे किए थे, उनको पूरा करवाने के लिए ही आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बॉर्डर खोलने के लिए तैयार नहीं हो रही है। हरियाणा सरकार के रास्ता न खोलने पर व्यापारियों को भी किसानों का साथ देने के साथ भाजपा के खिलाफ आंदोलन करना चाहिए। 300 मीटर पंजाब की तरफ बॉर्डर का एरिया पड़ता है, इसलिए बॉर्डर खोलने का आदेश पंजाब सरकार के लिए भी है। डल्लेवाल ने कहा कि शुभकरण की शॉट गन से मौत पर हरियाणा गुमराह करने का प्रयास कर रहा है। हरियाणा पुलिस भी शॉट गन का इस्तेमाल करती रही है। पूरे मामले में आरोपियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। शुभकरण की हत्या की जांच हरियाणा के पुलिस अधिकारियों को सौंपना उचित नहीं है, क्योंकि हरियाणा पुलिस के अधिकारियों पर ही आरोप हैं। यदि आरोपी ही जांच करेंगे तो न्याय मिलने की उम्मीद न के बराबर है। हरियाणा सरकार पहले ही सुप्रीम कोर्ट में जाकर शुभकरण की हत्या की स्वतंत्र जांच का विरोध कर चुकी है, जिससे उनकी मंशा साफ हो गई थी, इसलिए जांच के मुद्दे पर वह हरियाणा पुलिस पर विश्वास नहीं कर सकते।
संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) एवं किसान मजदूर मोर्चा का साझा सम्मेलन नई दिल्ली में 22 जुलाई को होगा। दोनों मोर्चों ने राहुल गांधी, अखिलेश यादव समेत विपक्ष के तमाम नेताओं से मुलाकात के लिए पत्र लिखा है और उनसे मुलाकात करके संसद के आगामी सत्र में एमएसपी गारंटी कानून समेत किसानों की तमाम मांगों पर प्राइवेट बिल लाने की मांग की जाएगी। आने वाले दिनों में हरियाणा में घर-घर जाकर दोनों मोर्चों के पदाधिकारी किसानों व मजदूरों को जागरूक करेंगे। 15 सितंबर को हरियाणा में राष्ट्रीय स्तर की किसान महापंचायत की जाएगी, जिसमें लाखों किसान शामिल होंगे।
अंबाला में धारा 163 लागू
अंबाला की जिला उपायुक्त डॉ. शालीन ने जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लगा दी है। इन आदेशों के तहत पांच या इससे ज्यादा व्यक्तियों के एकत्रित होने पर पाबंदी रहेगी। एसपी कार्यालय के 200 मीटर के दायरे में भीड़ एकत्रित नहीं हो सकेगी। ये आदेश 17 जुलाई से आगामी दो माह तक लागू रहेंगे। दातासिंहवाला बॉर्डर पर किसानों की सक्रियता बढ़ने लगी है। 17 और 18 जुलाई के अंबाला एसपी कार्यालय के घेराव को लेकर पंजाब के बठिंडा व सिरसा से एक हजार किसानों का जत्था पहुंच चुका है। इसके अलावा और भी किसान आ रहे हैं। शंभू बॉर्डर खोलने के पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ हरियाणा सरकार की स्पेशल लीव पिटीशन (एसएलपी) पर सुप्रीम कोर्ट 22 जुलाई को सुनवाई करेगा। सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से जल्द सुनवाई की मांग की।

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