वतन की शान की खातिर
सुबह और शाम लिख देंगे
करे दुश्मन अगर धोखा
तो इंतकाम लिख देंगे
मिटा देंगे खुद को हम
देश के शान की खातिर
जो ललकारे अगर दुश्मन
तो अंजाम लिख देंगे
मिटा सके भारत का नाम
है किसी में दम नही
तिरंगे के सम्मान की
विश्व में पहचान लिख देंगे
तरन्नुम है वतन मेरा
मोहब्बत है वतन मेरा
आरजू इस पे मरने की
ये पैगाम लिख देगें
जवानी झूम के आती
दीवाने दिल धङकते हैं
दुश्मन के नापाक इरादों पर
कब्रिस्तान लिख देंगे
कवयित्री प्रज्ञा श्रीवास्तव “प्रज्ञान्जलि”






