मातृ दिवस पर विशेष… एक पाती माँ के नाम…
माँ की लोरी में सुकून है
माँ चंदन है, कुमकुम है, प्रसून है
माँ श्रद्धा है, त्याग है, तपस्या है
माँ बाधाओं में भी हिम्मत का हिस्सा है
माँ के आँचल में ममत्व का अहसास है
माँ संवेदना है, भावना है, विश्वास है
माँ के हाथों में बहुत स्वाद है
माँ बिन बोले ही समझ जाती सब राज है
माँ गीता है, वेद है, कुरान है
माँ हर समस्या का समाधान है
माँ शगुन है, आरती है
माँ जीवन को संवारती है
माँ साहस है, शक्ति है
माँ ईश्वर की भक्ति है
माँ कुदरत की अनमोल कृति है
माँ का बिछुड़ना, सबसे बड़ी क्षति है
कवियत्री प्रज्ञा श्रीवास्तव “प्रज्ञांजलि”
जयपुर






