सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को अनारक्षित वर्ग की सीटों पर मेरिट के आधार पर प्रवेश देने से मना कर दिया गया था। उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को अपने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार मेरिट के आधार पर अनारक्षित वर्ग की सीटों पर क्षैतिज आरक्षण के तहत दावा कर सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने सौरभ यादव बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले को आधार बनाते हुए यह निर्णय लिया कि एससी/एसटी/ओबीसी वर्ग (आरक्षित वर्ग) के उम्मीदवार अपनी योग्यता के आधार पर अनारक्षित या सामान्य वर्ग की सीटों पर भी क्षैतिज आरक्षण के तहत दावा करने के पात्र हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए कहा कि आरक्षित वर्ग के मेधावी छात्रों को सामान्य कोटे में प्रवेश से वंचित करना अन्यायपूर्ण है।
मध्य प्रदेश में, शिक्षा प्रवेश नियम 2018 के तहत सरकारी स्कूल से पढ़े छात्रों के लिए 5 फीसदी सीटें आरक्षित हैं, और जिन सीटों की आवश्यकता नहीं है, उन्हें ओपन कैटेगरी में स्थानांतरित कर दिया जाता है। याचिका में यह मांग की गई थी कि पहले आरक्षित वर्ग के मेधावी छात्रों को ये सीटें दी जाएं। हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता के पक्ष में निर्णय दिया है।
अपीलकर्ताओं ने कहा कि उच्च न्यायालय ने सौरभ यादव के मामले में पारित आदेश को मान्यता न देकर गलती की है, और इससे मेधावी उम्मीदवारों को उचित अवसर नहीं मिला। कोर्ट ने कहा कि ‘खुली श्रेणी सभी के लिए खुली है, और इसमें केवल योग्यता एकमात्र शर्त है, चाहे उम्मीदवार को किसी भी प्रकार का आरक्षण लाभ मिला हो या नहीं।’
आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार योग्यता के आधार पर कर सकते हैं अनारक्षित सीटों पर दावा- सुप्रीम कोर्ट






