भारत में हर दसवां व्यक्ति कनाडा में नौकरी करने और वहीं बसने का सपना देखता है, जिसमें पंजाब के लोगों की संख्या सबसे अधिक है। लेकिन अब यह सपना शायद अधूरा ही रह जाए, क्योंकि कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो, जो भारत के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं, ने भारत सहित विदेशी कामगारों को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। इस फैसले से भारतीयों को बड़ा झटका लगा है। दरअसल, प्रधानमंत्री ट्रूडो ने घोषणा की है कि कनाडा की अर्थव्यवस्था और श्रम बाजार को बढ़ावा देने के लिए कम वेतन वाले और अस्थायी विदेशी श्रमिकों की संख्या को कम किया जाएगा। इसके साथ ही कनाडा की कंपनियां घरेलू कामगारों और युवाओं में अधिक निवेश करेंगी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में ट्रूडो ने कहा कि वे कनाडा में कम वेतन वाले, अस्थायी विदेशी श्रमिकों की संख्या को कम कर रहे हैं। उनका कहना है कि श्रम बाजार में बदलाव आ गया है और अब कनाडा के व्यवसायों को कनाडाई श्रमिकों और युवाओं में निवेश करने का समय आ गया है।
कनाडा में भारतीय मूल के लोग सबसे बड़े विदेशी समुदायों में से एक हैं, जहां 2021 तक लगभग 1.86 मिलियन इंडो-कैनेडियन रहते थे। भारतीय आप्रवासी कनाडा की कुल जनसंख्या का 2.4% हिस्सा बनाते हैं, जो चीन और फिलीपींस से भी अधिक है। कनाडा भारतीय तकनीकी प्रतिभाओं को भी आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है। 2023 में, कनाडा ने संयुक्त राज्य अमेरिका के एच1-बी वीज़ा धारकों को ओपन वर्क परमिट की पेशकश की थी, और इस कार्यक्रम ने इतने आवेदन आकर्षित किए कि यह 48 घंटों से भी कम समय में 10,000 की सीमा तक पहुँच गया। एक रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2024 के अंत तक कनाडा में भारतीयों की संख्या 20 लाख तक पहुँचने की संभावना है। साल 2022 में, 118,095 भारतीय कनाडा में स्थायी निवासी बने और उनमें से 59,503 ने कनाडाई नागरिकता प्राप्त की। 2024 की पहली तिमाही में, कनाडा ने 37,915 नए भारतीय स्थायी निवासियों को प्रवेश दिया, जो 2023 की पहली तिमाही की तुलना में 8,175 कम हैं।
भारतीयों को अब कनाडा में नौकरी पाना होगा मुश्किल, प्रधानमंत्री ट्रूडो ने लिया फैसला





