कानपुर में यूपी स्वास्थ्य विभाग के डिप्टी डायरेक्टर आदित्य वर्धन सिंह की गंगा में डूबने से मौत हो गई। घटना के समय गोताखोरों ने उनके दोस्त से 10,000 रुपये की मांग की। जब तक उनके दोस्त ने पास के दुकान पर पैसे ट्रांसफर किए, तब तक डिप्टी डायरेक्टर डूब चुके थे। सवाल यह उठ रहा है कि एक महत्वपूर्ण अधिकारी और उनकी पत्नी जज होने के बावजूद उनके दोस्त के पास 10,000 रुपये नहीं थे। इसके साथ ही, लोग प्रशासन पर भी सवाल उठा रहे हैं कि जब इतनी बड़ी घटना एक उच्च अधिकारी के साथ हुई, तो आम लोगों के साथ क्या होगा। प्रशासन को घाट पर गोताखोरों की तैनाती करनी चाहिए ताकि ऐसी घटनाओं में तुरंत मदद मिल सके।
शनिवार को कानपुर के नाना मऊ घाट पर डिप्टी डायरेक्टर अपने दोस्त प्रदीप तिवारी के साथ गंगा में नहा रहे थे। उनकी पत्नी शैलजा मिश्रा महाराष्ट्र में जज हैं और उनके चचेरे भाई अनुपम सिंह बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सचिव हैं। नहाते समय अचानक आदित्य का पैर गंगा के गड्ढे में चला गया और वह डूबने लगे। दोस्तों ने गोताखोरों से मदद मांगी, लेकिन गोताखोरों ने 10,000 रुपये की मांग की। पैसे ट्रांसफर होने के बाद भी डिप्टी डायरेक्टर को नहीं बचाया जा सका। पुलिस और एसडीआरएफ की टीम मौके पर आई, लेकिन रात तक आदित्य की लाश नहीं मिल सकी। क्षेत्रीय प्रधान ने भी स्थिति का जायजा लिया। शैलेश गौतम, जिनके अकाउंट में पैसे ट्रांसफर किए गए थे, ने बताया कि गोताखोर पैसे मांग रहे थे और उन्होंने पैसे वापस कर दिए हैं।
एडीसीपी बृजेंद्र द्विवेदी ने कहा कि डिप्टी डायरेक्टर की तलाश जारी है और सुबह से अभियान चलाया जा रहा है। लोगों का कहना है कि प्रशासन को घाट पर गोताखोरों की तैनाती करनी चाहिए ताकि इस तरह की घटनाओं में त्वरित सहायता मिल सके। आदित्य की बहन विदेश में हैं और माता-पिता भी वहां ही हैं, जबकि उनके भाई अनुपम सिंह मौके पर पहुंच गए हैं। उनकी पत्नी सोमवार को पहुंचेंगी। आदित्य लखनऊ के इंदिरा नगर में रहते थे।
गंगा में डूबने से मौत, पैसा ट्रांसफर कराए बिना नदी में नहीं उतरे गोताखोर



