बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद अब इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाज़ी का दौर शुरू हो गया है। जलदाय मंत्री कन्हैया लाल चौधरी ने कहा कि चाहे राजस्थान हो या उत्तर प्रदेश, सरकारों ने किसी अपराध या अपराधी के कारण मकान नहीं तोड़े हैं। जो मकान तोड़े गए हैं, वे अवैध रूप से बनाए गए थे। बुलडोजर की कार्रवाई सिर्फ अवैध निर्माण पर की जाती है और यह एक नियमित प्रक्रिया है। केवल एक विशेष समुदाय का नाम जोड़कर इसे अलग रूप दे दिया जाता है।
इसी मुद्दे पर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि देश में पिछले कुछ वर्षों से शुरू हुए ‘बुलडोजर कल्चर’ पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी स्वागत योग्य है। किसी भी आरोपी के घर पर बुलडोजर चलाना न्याय नहीं है। दो साल पहले मैंने इस कल्चर के खिलाफ सार्वजनिक रूप से ऐसे ही विचार व्यक्त किए थे, जैसे सुप्रीम कोर्ट ने अब टिप्पणी की है। त्वरित न्याय जैसे सिद्धांत सभ्य और कानून का पालन करने वाले समाज में स्वीकार्य नहीं हैं और संविधान की मूल भावना के बिल्कुल विपरीत हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि केवल आरोप लगने पर किसी के घर को उजाड़ना सही नहीं है। कौन आरोपी है और कौन दोषी है, इसका निर्णय तो कोर्ट में होता है। सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए जो लोग इस तरह के तरीके अपनाते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। ज्ञात हो कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद, राजस्थान के उदयपुर के राशिद खान और मध्य प्रदेश के मोहम्मद हुसैन की याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि बदले की भावना से अल्पसंख्यकों के मकान बिना नोटिस दिए गिराए जा रहे हैं।
बुलडोजर की कार्रवाई सिर्फ़ अवैध निर्माण पर होती है-जलदाय मंत्री राजस्थान सरकार





