“कुली…ए कुली!” सफर के दौरान यात्री स्टेशन आने या बाहर जाने के लिए अक्सर कुली को बुलाते हैं। कुली आकर यात्रियों का भारी सामान उठाकर उनका सफर आसान बना देता है। आमतौर पर हर छोटे-बड़े रेलवे स्टेशन पर कुली मिल जाते हैं, लेकिन हरियाणा की आर्थिक राजधानी गुड़गांव रेलवे स्टेशन पर कुली नहीं मिलते। यात्री कुली को ढूंढ़ते हैं, लेकिन वह कहीं नजर नहीं आता। दरअसल, करीब 150 साल पुराने इस स्टेशन पर कोई कुली उपलब्ध ही नहीं है, जिससे यात्रियों को अपना सामान खुद ही उठाना पड़ता है।
गुड़गांव रेलवे स्टेशन को 1873 में अंग्रेजों ने बनाया था और यहां से फर्रुखनगर तक नमक की सप्लाई की जाती थी। 14 फरवरी 1873 को इस मार्ग पर पहली ट्रेन चली थी, और बाद में इसे रेवाड़ी रूट पर भी शुरू किया गया। आजादी के बाद यह रेलवे रूट महत्वपूर्ण हो गया और यहां से दक्षिण-पश्चिम की लंबी दूरी की कई ट्रेनें चलने लगीं। आज, गुड़गांव स्टेशन से राजस्थान, गुजरात और उत्तर भारत के शहरों तक ट्रेनें जाती हैं। यहां से प्रतिदिन लगभग 80 सुपरफास्ट ट्रेनें गुजरती हैं और 30,000 से ज्यादा यात्री सफर करते हैं। इसके बावजूद भारी सामान वाले यात्रियों को खुद ही सामान उठाना पड़ता है।
गुड़गांव रेलवे स्टेशन को मॉडल स्टेशन बनाने की दिशा में काम हो रहा है, लेकिन यात्रियों की सबसे बड़ी समस्या यहां कुली न होना है। भारी सामान के साथ ट्रेन से उतरना और चढ़ना यात्री के लिए मुश्किल हो जाता है। खासकर अगर उन्हें फुटओवर ब्रिज से दूसरे प्लेटफार्म तक जाना हो, तो यह और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
यहां कब से कुली नहीं हैं, इसका जवाब रेलवे अधिकारियों के पास भी नहीं है। स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि पिछले करीब 30 साल से यहां कोई कुली नहीं है। आने वाले समय में भी कब कुली उपलब्ध होंगे, इस पर भी कोई निश्चित जानकारी नहीं है।
दैनिक यात्री संघ के अध्यक्ष योगेंद्र का कहना है कि गुड़गांव स्टेशन पर कुली की बहुत आवश्यकता है, और इसके लिए कई बार रेलवे अधिकारियों से मांग की गई है। यदि शुरुआती तौर पर पांच कुली भी स्टेशन पर उपलब्ध कराए जाते हैं, तो यात्रियों को काफी राहत मिलेगी। दूसरी ओर, रेलवे अधिकारियों का कहना है कि कुली की मांग कई बार उच्चाधिकारियों तक भेजी गई है, और अब निर्णय उन्हीं को लेना है।
150 साल पुराना स्टेशन, 80 से अधिक सुपरफास्ट ट्रेन, एक भी कुली नहीं, खुद ही उठाना पड़ता है सामान





