इस साल राजस्थान में अगस्त तक पोक्सो एक्ट के तहत 1529 मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि पिछले साल इसी अवधि तक 1497 मामले सामने आए थे। मामूली वृद्धि के साथ, अधिकतर पीड़ित बच्चियों की उम्र 4 से 14 साल के बीच है। अगर शहरों और रेंज के हिसाब से देखें, तो लगभग हर रेंज में इस तरह के अपराध बढ़े हैं। अजमेर रेंज में 148 केस, जयपुर कमिश्नरेट में 113 केस, जयपुर रेंज में 203 और सीकर रेंज में 99 केस दर्ज किए गए हैं। बीकानेर में 142, भरतपुर में 145, जोधपुर कमिश्नरेट में 45, जोधपुर रेंज में 90, पाली में 91 और कोटा रेंज में सबसे ज्यादा 121 केस दर्ज हुए हैं। उदयपुर रेंज में 151 और बांसवाड़ा रेंज में 89 केस सामने आए हैं। शहरों में, अलवर में 71, बीकानेर में 61, और झालावाड़ में 53 केस दर्ज हुए हैं, जो प्रदेश के सबसे अधिक केस वाले जिले हैं।
राजस्थान पुलिस पोक्सो एक्ट से संबंधित मामलों को लेकर बेहद गंभीर है। पहले इन मामलों की गिनती कुल रेप केसों में की जाती थी, लेकिन इस साल से पुलिस ने इन मामलों की अलग गणना शुरू की है ताकि इन पर गंभीरता से ध्यान दिया जा सके और तुरंत कार्रवाई हो सके। इसका सकारात्मक परिणाम यह हुआ है कि कोर्ट से भी आरोपियों को जल्द सजा मिल रही है। राजस्थान पुलिस के आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि छोटी बच्चियों के साथ रेप और छेड़छाड़ की घटनाओं में कोई कमी नहीं हो रही है। चिंता की बात यह है कि 80% से ज्यादा मामलों में आरोपी परिवार या नजदीकी लोग ही होते हैं। हर रोज औसतन छह से ज्यादा बच्चियां इन घटनाओं का शिकार हो रही हैं।
वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. अनिता गौतम का कहना है कि बच्चियों के साथ दरिंदगी करने वालों की मानसिकता विकृत होती है। ज्यादातर मामलों में देखा गया है कि आरोपी वारदात से पहले शराब या पॉर्न के प्रभाव में होते हैं, जिससे उन्हें बच्चे सबसे कमजोर शिकार लगते हैं, क्योंकि बच्चे विरोध नहीं कर पाते और उनकी पहचान भी नहीं हो पाती है। बच्चों को टॉफी या चॉकलेट जैसे छोटे लालच से फंसाया जाता है। परिवार के साथ-साथ हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि बच्चे किसी खतरे में न पड़ें।
राजस्थान में पोक्सो एक्ट के तहत अगस्त तक 1529 मामले दर्ज, अधिकांश पीड़ितों की उम्र 4 से 14 साल तक






