दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कोयला घोटाले से संबंधित मामले में अपनी सजा पर रोक लगाने की मांग की थी। कोड़ा ने कोर्ट से अपनी दोषसिद्धि पर रोक इसलिए लगाने की अपील की थी ताकि वे आगामी विधानसभा चुनाव में भाग ले सकें।
जस्टिस विभू बाखरू की एकल न्यायाधीश पीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि अपीलकर्ता को किसी भी सार्वजनिक पद के लिए चुनाव लड़ने की अनुमति तब तक नहीं दी जा सकती, जब तक कि वे पूरी तरह से बरी नहीं हो जाते। कोर्ट ने यह भी कहा कि कोड़ा के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है, लेकिन केवल इसी आधार पर उनकी सजा पर रोक नहीं लगाई जा सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि मुकदमे के बाद ही अपीलकर्ता को दोषी ठहराया गया है।
निचली अदालत ने मधु कोड़ा, पूर्व कोयला सचिव एच.सी. गुप्ता, झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव ए.के. बसु, और कोड़ा के सहयोगी विजय जोशी को तीन साल की सजा सुनाई थी। इन सभी को कोलकाता स्थित विनी आयरन एंड स्टील इंडस्ट्री लिमिटेड (वीआईएसयूएल) को झारखंड के राजहरा नॉर्थ कोल ब्लॉक के आवंटन में भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश के लिए दोषी ठहराया गया था।
कोर्ट ने यूपीए शासनकाल के कोयला घोटाले में वीआईएसयूएल पर 50 लाख रुपये, कोड़ा पर 25 लाख रुपये, गुप्ता पर 1 लाख रुपये और बसु पर भी 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। दोषियों को उनकी अपील लंबित रहने तक जमानत पर रिहा किया गया था। मधु कोड़ा सितंबर 2006 से अगस्त 2008 तक झारखंड के मुख्यमंत्री रहे।
झारखंड विधानसभा चुनाव से पहले पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा की याचिका कोर्ट ने खारिज की






