साइबर अटैक का खतरा रोकने के लिए केंद्र सरकार ने बनाई समिति

डिजिटल प्लेटफॉर्म, क्लाउड सिस्टम पर बढ़ती निर्भरता और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते उपयोग के चलते साइबर सुरक्षा को लेकर न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में चिंता बढ़ गई है। साइबर सुरक्षा के लिए काम करने वाली संस्था प्रहार की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, साइबर अपराधी 2033 तक भारत में सालाना करीब एक लाख करोड़ साइबर हमले कर सकते हैं। यह अनुमान लगाया जा रहा है कि 2047 में जब भारत अपनी स्वतंत्रता के 100 वर्ष का जश्न मना रहा होगा, तब सालाना 17 लाख करोड़ साइबर हमले हो सकते हैं। हालाँकि, वैश्विक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन वे अभी तक पर्याप्त साबित नहीं हो रहे हैं।
बढ़ते साइबर अपराध और डिजिटल धोखाधड़ी को रोकने के लिए गृह मंत्रालय ने बुधवार को एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया है, जिसे गृह मंत्रालय के आंतरिक सुरक्षा सचिव मॉनिटर करेंगे। मंत्रालय का 14सी विंग सभी राज्यों की पुलिस से संपर्क में है और डिजिटल अरेस्ट पर विशेष अभियान चलाएगा। इस अभियान के तहत डिजिटल धोखाधड़ी की घटनाओं पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ भारत में साइबर हमलों के मामलों में हो रही बढ़ोतरी पर चिंता जताते हुए इससे निपटने के लिए ठोस उपायों की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं।
प्रहार की ‘द इनविजिबल हैंड’ नामक रिपोर्ट के अवसर पर साइबर विशेषज्ञों ने कहा कि यदि इस समस्या का समाधान नहीं निकाला गया, तो भारत के लोग असहाय महसूस करेंगे। हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने भी देशवासियों को ‘डिजिटल धोखाधड़ी’ के प्रति सचेत रहने का सुझाव दिया था और साइबर फ्रॉड से बचने के लिए ‘रुको-सोचो-एक्शन लो’ का मंत्र दिया था।
डिजिटल धोखाधड़ी के छह हजार से अधिक मामले:
• रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में भारत में 7.9 करोड़ से अधिक साइबर हमले हुए, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर आ गया है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 15% की वृद्धि है।
• इस वर्ष डिजिटल अरेस्ट से जुड़े 6,000 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। साइबर विंग ने अब तक छह लाख मोबाइल को ब्लॉक किया है, जो साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल हुए थे।
• 14सी विंग ने अब तक 709 मोबाइल एप्लिकेशन और साइबर फ्रॉड में शामिल 1.10 लाख आइएमईआइ को भी ब्लॉक किया है। 3.25 लाख फर्जी बैंक खातों को भी फ्रीज किया गया है।
सबसे बड़े मैलवेयर प्लेटफॉर्म का सर्वर बंद:
• यूरोपीय संघ ने दुनिया के सबसे बड़े मैलवेयर प्लेटफॉर्मों में से एक के सर्वर को बंद कर दिया है, जो दर्जनों देशों में 1,200 से अधिक सर्वरों पर मैलवेयर चला रहा था।
• साइबर अपराधियों ने इस मैलवेयर संक्रमित डिवाइस से नाम, पासवर्ड, पते, ईमेल और क्रिप्टो-करेंसी वॉलेट जैसी जानकारी चुराई, जिसे ग्रे-मार्केट में अन्य अपराधियों को बेचा गया।

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