संभल हिंसा को लेकर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के संभल में मस्जिद से जुड़ी याचिका में केवल पहुंच के अधिकार की मांग की गई थी, तो अदालत ने ढांचे का सर्वेक्षण कराने का आदेश क्यों दिया? ओवैसी ने कहा कि याचिका पढ़ने पर यह स्पष्ट होता है कि इसमें सिर्फ पहुंच के अधिकार का जिक्र था, ऐसे में सर्वेक्षण का आदेश देना गलत है।
हैदराबाद के सांसद ओवैसी ने पूछा, “अगर पूजा स्थल अधिनियम के अनुसार किसी धार्मिक स्थल की प्रकृति नहीं बदली जा सकती, तो सर्वेक्षण का आदेश क्यों दिया गया?” ओवैसी ने यह भी उल्लेख किया कि हाल ही में अजमेर शरीफ दरगाह को मंदिर घोषित करने की मांग वाली याचिका को स्वीकार करना भी चिंताजनक है। उन्होंने कहा, “यह दरगाह 800 साल से मौजूद है, और अमीर खुसरो ने भी अपनी किताबों में इसका जिक्र किया है। अब यह कहना कि यह दरगाह नहीं है, पूरी तरह गलत है।”
उन्होंने सवाल किया, “प्रधानमंत्री खुद उर्स के दौरान इस दरगाह पर चादर भेजते हैं। जब सरकार हर साल चादर भेजती है, तो इस विवाद पर उनका रुख क्या है?” ओवैसी ने कहा कि इस तरह के मुद्दे देश को कमजोर करते हैं और इन्हें बंद होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश को महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की आत्महत्या और चीन जैसे मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए, लेकिन इस तरह के विवादों से ध्यान भटकाया जा रहा है।
संघ प्रमुख मोहन भागवत के जनसंख्या वृद्धि पर दिए बयान का जिक्र करते हुए ओवैसी ने व्यंग्यात्मक रूप से कहा, “अब आरएसएस वालों को शादी करना शुरू कर देना चाहिए। भाजपा के सांसद कहते हैं कि दो से अधिक बच्चे पैदा करने वालों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा। उन्हें एक नीति पर टिके रहना चाहिए।”
गौरतलब है कि 19 नवंबर को संभल के सिविल जज की अदालत ने हिंदू पक्ष की याचिका पर संज्ञान लेते हुए शाही जामा मस्जिद का सर्वेक्षण कराने का आदेश दिया था। हिंदू पक्ष ने दावा किया कि मस्जिद का निर्माण 1526 में बाबर द्वारा एक मंदिर को तोड़कर किया गया था। 24 नवंबर को सर्वेक्षण के दौरान हिंसा भड़क गई, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए निचली अदालत को निर्देश देने से रोका और उत्तर प्रदेश सरकार को शांति बनाए रखने का आदेश दिया।
याचिका दायर होने के बाद मस्जिद के सर्वे का आदेश क्यों-ओवैसी






