राजस्थान में विधानसभा उपचुनाव के बाद अब पंचायतीराज चुनावों की सरगर्मियां तेज हो गई हैं। प्रदेश की 7,463 पंचायतों का कार्यकाल जनवरी-फरवरी में समाप्त होने वाला है। वहीं, सरकार ने स्थानीय निकायों के चुनाव पर रोक लगाकर प्रशासकों को चेयरमैन नियुक्त किया है। इससे सरपंचों में यह आशंका है कि सरकार पंचायत चुनाव रद्द कर प्रशासक नियुक्त न कर दे। इसी को लेकर प्रदेशभर के सरपंच 6 दिसंबर को जयपुर कूच करेंगे। सरपंचों का आरोप है कि पंचायत चुनाव टालकर प्रशासक नियुक्त करने की साजिश हो रही है। जनवरी में 40% सरपंचों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। सरपंचों की मांग है कि पंचायतों में प्रशासक नहीं लगाए जाएं, बल्कि एक कमेटी बनाकर सरपंचों को ही चेयरमैन बनाया जाए। हालांकि, सरकार ने पंचायत चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने गांव-गांव में मतदाता सूची अपडेट करने का काम तेज कर दिया है।
सरपंचों में चिंता का माहौल
सरपंचों को डर है कि सरकार चुनाव स्थगित कर प्रशासक नियुक्त कर सकती है। संविधान के 73वें और 74वें संशोधन के तहत हर 5 साल में चुनाव कराना अनिवार्य है, जिसे आपातकालीन स्थिति को छोड़कर आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। ऐसे में सवाल यह है कि अगर सरकार चुनाव टालने का फैसला करती है, तो उसे कानूनी रूप कैसे दिया जाएगा।
जनवरी-फरवरी में हो सकते हैं चुनाव
राजस्थान की 6,759 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल जनवरी और 704 पंचायतों का फरवरी में खत्म हो रहा है। इसे देखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग ने जिला कलक्टरों को मतदाता सूची अपडेट करने और मतदान केंद्र चिन्हित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही चुनाव की तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं। ऐसे में संभावना है कि ग्राम पंचायत चुनाव जनवरी और फरवरी में आयोजित हो सकते हैं।
पंचायतीराज चुनाव को लेकर 6 दिसंबर को प्रदेश भर के सरपंचों का जयपुर कूच






