सरगुजा जिले में मानव तस्करी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों के अनुसार, 500 नाबालिग लड़कियां और 85 नाबालिग लड़के लापता हुए हैं। हालांकि, सरगुजा पुलिस ने इनमें से अधिकांश को बरामद करने में सफलता पाई है। इन बच्चों को बिचौलियों द्वारा काम दिलाने के बहाने बड़े शहरों में ले जाया जाता है, जहां वे मानव तस्करी के जाल में फंस जाते हैं। इसी क्रम में, मंगलवार रात को उदयपुर पुलिस ने बस स्टैंड से 4 नाबालिग लड़कियां और 2 नाबालिग लड़कों को बरामद किया। ये सभी पंडो जनजाति से संबंधित हैं और इन्हें काम दिलाने के बहाने बड़े शहर ले जाने की तैयारी थी। पुलिस ने एक संदिग्ध को भी हिरासत में लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है।
मुखबिर से सूचना मिलने के बाद उदयपुर थाना प्रभारी कुमारी चंद्राकर ने टीम के साथ बस स्टैंड पर वाहनों की तलाशी शुरू की। तलाशी के दौरान एक ऑटो रिक्शा में 4 नाबालिग लड़कियां और 2 लड़के मिले। पूछताछ में पता चला कि उन्हें अंबिकापुर ले जाया जा रहा था। पुलिस ने सभी बच्चों को हिरासत में लेकर विशेष पूछताछ के लिए सीडब्ल्यूसी को सौंप दिया है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमोलक सिंह ढिल्लो ने बताया कि ये सभी नाबालिग लड़कियां उदयपुर थाना क्षेत्र के ग्राम सानीबर्रा के पंडो पारा की निवासी हैं। उन्हें उत्तर प्रदेश ले जाने की योजना बनाई गई थी, जहां उनसे ईंट-भट्ठों पर काम करवाया जाता। अधिक मजदूरी दिलाने का झांसा देकर इन्हें फंसाया जा रहा था। पुलिस ने इस मामले में रामजीत प्रजापति नामक बिचौलिए को हिरासत में लिया है, जो उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर का रहने वाला है। मामले की जांच जारी है।
गुजरात: मानव तस्करी के आरोप में युवक गिरफ्तार, उदयपुर पुलिस ने नाबालिग बच्चों को छुड़ाया, गुजरात से उत्तर प्रदेश ले जा रहे थे आरोपी






