दिल्ली: पुराने राशनकार्ड निरस्त होंगे, अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या और बांग्लादेशी प्रवासियों की भी होगी जाँच

दिल्ली सरकार में पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा कि दिल्ली में सभी पुराने राशन कार्ड रद्द किए जाएंगे, ताकि यह जांचा जा सके कि पिछली सरकार ने अवैध रोहिंग्या और बांग्लादेशी प्रवासियों को इस सुविधा का लाभ लेने की अनुमति दी थी या नहीं।

दिल्ली की सत्ता में 27 साल बाद पूर्ण बहुमत से वापसी के बाद, भाजपा पिछली सरकार के कामकाज की समीक्षा में जुट गई है। दिल्ली विधानसभा में पेश की गई सीएजी रिपोर्ट में नए-नए खुलासे सामने आ रहे हैं, जिसके चलते भाजपा नेता आम आदमी पार्टी पर आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। शुक्रवार को दिल्ली सरकार में पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा कि भाजपा सरकार सभी पुराने राशन कार्डों को निरस्त करेगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि पिछली सरकार ने अवैध रोहिंग्या और बांग्लादेशी प्रवासियों को इस सुविधा का उपयोग करने दिया था या नहीं। उन्होंने आगे कहा, “हमारी सरकार नए राशन कार्ड बनाएगी और साथ ही उन पुराने कार्डों पर कार्रवाई करेगी, जिनका ‘विदेशी’ अवैध रूप से उपयोग कर रहे हैं।”

अरविंद केजरीवाल पर फिजूलखर्ची का आरोप
विधानसभा में सीएजी रिपोर्ट पर चर्चा के दौरान प्रवेश वर्मा ने दावा किया कि दिल्ली सचिवालय में मुख्यमंत्री कार्यालय की फिजूलखर्ची देखकर वे हैरान रह गए। उन्होंने कहा, “मुझे तुरंत वहां से जाने का मन हुआ, क्योंकि मुझे लगा कि जो व्यक्ति ऐसे महंगे कार्यालय में बैठता है, वह जनता के हित में काम नहीं कर सकता।” उन्होंने आरोप लगाया कि जब दिल्ली के लोग पानी की कमी, ट्रैफिक जाम और सफाई की समस्याओं से जूझ रहे थे, तब केजरीवाल अपने महल जैसे आवास में सोने की परत चढ़ी शौचालय सीटें लगवाने में व्यस्त थे। मंत्री ने कहा कि नई सरकार की प्राथमिकता आलीशान महल नहीं, बल्कि झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वालों को स्वच्छ जल, सफाई और अन्य आवश्यक सेवाएं प्रदान करना होगा।

दिल्ली में बदलाव लाने का मौका
प्रवेश वर्मा ने कहा कि दिल्ली का विकास केवल आम आदमी पार्टी के होर्डिंग्स तक सीमित रहा है। उन्होंने कहा कि 27 साल बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दिल्ली के पास असली बदलाव लाने का अवसर है। इस दौरान दिल्ली सरकार में मंत्री आशीष सूद ने दावा किया कि पिछली विधानसभाओं में केवल नौ बार प्रश्नकाल हुआ और बीते पांच वर्षों में मात्र 14 विधेयक पारित किए गए, जिनमें से पांच विधायकों के वेतन वृद्धि से संबंधित थे।
ग्रेटर कैलाश की विधायक शिखा राय ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के नियमों के कारण बड़े हो चुके पेड़ों से उत्पन्न समस्याओं को उजागर किया। उन्होंने कहा, “लोगों के घरों में घुस रहे पेड़ों की छंटाई के लिए भी वन विभाग से अनुमति लेना बहुत कठिन है।” वहीं, मुस्तफाबाद के विधायक मोहन सिंह बिष्ट ने पिछली सरकार द्वारा बिछाई गई सीवर लाइनों की “खराब” स्थिति पर सवाल उठाए। उन्होंने इस मामले की जांच और नई सीवर लाइनें बिछाने की मांग की।

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