जयपुर: राजस्थान की राजनीति में शुक्रवार को एक बड़ा घटनाक्रम तब सामने आया जब अंता से भाजपा विधायक कंवरलाल मीणा की विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी गई। 20 साल पुराने एक आपराधिक मामले में तीन साल की सजा मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई। इस निर्णय के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा पर जमकर हमला बोला।
पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने सदस्यता रद्द करने में हुई देरी पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जिस दिन मीणा को सजा सुनाई गई थी, उसी दिन उनकी सदस्यता समाप्त हो जानी चाहिए थी। उन्होंने आरपी एक्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि सजा मिलते ही सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है। गहलोत ने पूछा कि जब नियम इतने स्पष्ट हैं, तो फिर विधानसभा अध्यक्ष को निर्णय लेने में 23 दिन क्यों लगे? उन्होंने आरोप लगाया कि यह देरी भाजपा सरकार के दबाव में की गई।
सरकार की निष्क्रियता पर सवाल
गहलोत ने सिर्फ सदस्यता मुद्दे पर नहीं, बल्कि सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गर्मी में मज़दूरों की मौत, पानी की गंभीर समस्या और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर सरकार पूरी तरह निष्क्रिय है। उन्होंने बीकानेर, चुरू, गंगानगर और हनुमानगढ़ में जल संकट की स्थिति को लेकर सरकार को आगाह किया।
डोटासरा और जूली का भी हमला
डोटासरा ने सोशल मीडिया पर कहा कि कांग्रेस के दबाव और टीकाराम जूली द्वारा दायर अवमानना याचिका के चलते भाजपा को आखिरकार कंवरलाल मीणा की सदस्यता रद्द करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि संविधान सर्वोपरि है और कांग्रेस लगातार भाजपा और आरएसएस को यह याद दिलाती रहेगी। डोटासरा ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद विधायक को बचाने की कोशिश की गई। अंततः सत्य की जीत हुई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस संविधान और कानून की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।






