
एडीजीपी वाई पूरन कुमार के शव में करीब छह दिन बाद शुरू हुई सड़न (डीकंपोज़िशन) जांच के कई अहम सबूतों को प्रभावित कर सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी देर बाद मौत का सही समय निर्धारित करना काफी कठिन हो जाता है।
आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार की आत्महत्या के मामले में हरियाणा सरकार ने आखिरकार कदम उठाते हुए रोहतक के एसपी नरेंद्र बिजारणिया का तबादला कर दिया है। वहीं, डीजीपी शत्रुजीत कपूर को छुट्टी पर भेजने की संभावना है और उनकी जगह वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी आलोक मित्तल को डीजीपी नियुक्त किया जा सकता है। इस कार्रवाई के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि वाई पूरन कुमार का परिवार पोस्टमार्टम के लिए तैयार हो सकता है, हालांकि शनिवार देर शाम तक परिवार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया था। पांचवें दिन भी पोस्टमार्टम नहीं हो सका और वरिष्ठ अधिकारी लगातार परिवार से बातचीत में जुटे रहे।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पहली बार इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि एडीजीपी के परिवार के साथ अन्याय हुआ है और न्याय दिलाना सरकार की जिम्मेदारी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए शनिवार को प्रस्तावित कैबिनेट बैठक को भी स्थगित कर दिया गया। यह बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 17 अक्टूबर के हरियाणा दौरे की तैयारियों को लेकर थी।
शनिवार दोपहर को सरकार ने रोहतक के एसपी नरेंद्र बिजारणिया को पद से हटा दिया। उन्हें अभी नई पोस्टिंग नहीं दी गई है और उनकी जगह सुरेंद्र भौरिया को रोहतक का नया एसपी बनाया गया है। इससे पहले, वाई पूरन कुमार का शव सेक्टर-16 अस्पताल से पीजीआई शवगृह ले जाया गया तो परिजनों ने इस पर आपत्ति जताई, जिससे विवाद बढ़ गया। अफवाह फैली कि पोस्टमार्टम शुरू हो गया है, जिसके बाद चंडीगढ़ पुलिस के डीजीपी सागर प्रीत हुड्डा और एसएसपी कंवरदीप कौर मौके पर पहुंचे और स्पष्ट किया कि पोस्टमार्टम नहीं हुआ है।
सरकार और प्रशासन की ओर से अमनीत पी कुमार और परिवार को मनाने की कोशिशें देर रात तक जारी रहीं। मुख्यमंत्री के निर्देश पर मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी उनके घर पहुंचे और संदेश दिया कि डीजीपी को छुट्टी पर भेजा जा रहा है। मुख्यमंत्री सैनी ने विपक्ष को जवाब देते हुए कहा कि यह मामला बेहद दुखद है और दोषी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति न की जाए। वहीं, जांच के दृष्टिकोण से शव में शुरू हुई सड़न कई तकनीकी मुश्किलें पैदा कर रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार:
• मौत का समय निर्धारित करना कठिन हो जाता है, क्योंकि तापमान, नमी और माहौल के कारण चार दिन बाद अनुमान सटीक नहीं रहता।
• गनशॉट रेजिड्यू (गोली के बारूद का अवशेष) समय और पर्यावरण के प्रभाव से नष्ट हो सकता है, जिससे साक्ष्य लगभग समाप्त हो जाते हैं।
• घावों की विशेषताएँ — जैसे गोली का कोण और दूरी — सड़न के कारण स्पष्ट रूप से पहचान में नहीं आतीं।
• त्वचा की संरचना गलने या सिकुड़ने लगती है, जिससे फिंगरप्रिंट और घावों की सटीक जांच मुश्किल हो जाती है।
इसी वजह से ऐसे मामलों में जल्द पोस्टमार्टम और सबूतों का संरक्षण बेहद अहम माना जाता है।






