‘भाजपा नोटों के दम पर चुनाव जीतना चाहती है – ममता बनर्जी

देश के 12 राज्यों में आज से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसको लेकर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक माहौल गर्म है। राज्य की सत्ताधारी पार्टी टीएमसी जहां इस प्रक्रिया का विरोध कर रही है, वहीं विपक्षी भाजपा का आरोप है कि अवैध घुसपैठियों को मतदाता सूची में शामिल कर राज्य की जनसांख्यिकी (डेमोग्राफी) को बदला जा रहा है।

टीएमसी एसआईआर के खिलाफ
एसआईआर के विरोध में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मोर्चा संभाल लिया है। उनका कहना है कि भाजपा बंगाली प्रवासियों को बांग्लादेशी बताकर बंगाल के खिलाफ झूठे प्रचार में लगी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा मतदाता सूची के इस विशेष पुनरीक्षण के ज़रिए बंगाल के मतदाताओं को डराने का प्रयास कर रही है। ममता बनर्जी ने कहा कि भाजपा चुनाव वोटों से नहीं, बल्कि नोटों के सहारे जीतना चाहती है। एसआईआर के खिलाफ निकाली गई रैली में उन्होंने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा, “अगर बंगाल में एक भी पात्र मतदाता का नाम सूची से हटाया गया, तो हम भाजपा सरकार को गिराने तक की लड़ाई लड़ेंगे।” टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा कि एसआईआर की घोषणा के बाद जिन लोगों की मौत हुई, आज हम उनके परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट करते हैं। उन्होंने बताया कि आज की विरोध रैली में हजारों लोग शामिल हुए हैं। अभिषेक ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा, “अगर दो दिनों में हम इतनी बड़ी भीड़ जुटा सकते हैं, तो सोचिए जब हम एसआईआर के खिलाफ दिल्ली कूच करेंगे, तब आंदोलन का पैमाना कितना बड़ा होगा।” उन्होंने दावा किया कि पिछले सात दिनों में एसआईआर के डर से जिन लोगों की जान गई, उनके परिवारजन आज की रैली में शामिल हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया, “अब अगला पड़ाव दिल्ली है, जहां हम एसआईआर के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ेंगे।”
पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा कि अगर ममता बनर्जी को कोई आपत्ति है तो वे सुप्रीम कोर्ट जा सकती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त है और ममता सरकार अराजकता फैलाने में जुटी है। भट्टाचार्य ने कहा, “ममता बनर्जी रोहिंग्याओं को राज्य में बुला रही हैं। क्या बंगाल के लोग चाहते हैं कि रोहिंग्याओं को मतदाता सूची में शामिल किया जाए? सिर्फ बंगाल ही नहीं, बिहार और झारखंड में भी जनसांख्यिकी बदली जा रही है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल के नागरिक एसआईआर चाहते हैं और यह प्रक्रिया हर हाल में पूरी होकर रहेगी।

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