बिहार: प. चंपारण के गांधी आश्रम में मौन पर बैठे प्रशांत किशोर, करेंगे आत्मचिंतन

चुनाव परिणामों के बाद आत्मविश्लेषण की राह पर चल पड़े जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर मंगलवार को पश्चिम चंपारण स्थित भितिहरवा के ऐतिहासिक गांधी आश्रम में सुबह 11 बजे से एक दिन के मौन उपवास पर बैठे। यह वही स्थान है जहां महात्मा गांधी ने सत्य, अनुशासन और आत्मशुद्धि के माध्यम से सामाजिक बदलाव की शुरुआत की थी। इसी प्रतीकात्मक जगह को चुनकर प्रशांत किशोर ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में उनकी राजनीति और भी जनकेंद्रित और आत्ममंथन पर आधारित होगी।
इस उपवास में प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती, वरिष्ठ नेता व भोजपुरी अभिनेता रितेश पांडे, जिलाध्यक्ष, प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी और पार्टी के कई कार्यकर्ता शामिल हुए। राज्य के विभिन्न जिलों से 50 से अधिक समर्थक और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग उन्हें देखने और समर्थन देने पहुंचे। आश्रम परिसर के बाहर लगभग 250 लोगों के लिए साधारण टेंट, बिस्तर और कंबल की व्यवस्था की गई है। भोजपुरी अभिनेता और जन सुराज नेता रितेश पांडे ने चुनाव परिणामों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दलों ने वोट खरीदकर लोकतांत्रिक प्रणाली की पवित्रता को ठेस पहुंचाई। उन्होंने कहा कि गरीबों की मजबूरी का राजनीतिक सौदा करना बिहार की अस्मिता के खिलाफ है। उन्होंने आगे कहा कि प्रशांत किशोर ने ईमानदारी से राजनीति की, लेकिन लोकतंत्र में पैसे का प्रभाव हावी रहा। रितेश पांडे के अनुसार, प्रशांत किशोर गांधीवादी विचारधारा से प्रभावित हैं और यही कारण है कि उन्होंने आत्ममंथन और संवाद की समीक्षा के लिए गांधी परंपरा के अनुसार मौन उपवास को चुना। उन्होंने यह भी बताया कि चुनाव के बाद कई लोगों ने फोन कर कहा कि वोट खरीदे गए, जिससे प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। पांडे ने कहा कि भले ही पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी, लेकिन बेरोजगारी, शिक्षा, पलायन जैसे मुद्दों पर संघर्ष जारी रहेगा।
प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने स्वीकार किया कि पार्टी लगातार तीन वर्षों से गांव-गांव जाकर जनता को जागरूक करने का प्रयास कर रही थी, लेकिन या तो संदेश जनता तक सही तरीके से नहीं पहुंच सका या पार्टी अपनी बात स्पष्ट रूप से नहीं रख पाई। उन्होंने कहा कि यह मौन उपवास केवल पीके का नहीं बल्कि पूरे संगठन का आत्मनिरीक्षण है। मौन उपवास से एक दिन पहले प्रशांत किशोर ने मीडिया से कहा था कि यह कार्यक्रम किसी राजनीतिक रैली या शक्ति प्रदर्शन का हिस्सा नहीं है, बल्कि आत्ममूल्यांकन का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जब संदेश जनता तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंचता, तो नेतृत्व का कर्तव्य है कि वह खुद का मूल्यांकन करे।
भितिहरवा आश्रम का चयन सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं बल्कि राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि गांधी ने यहीं से स्वच्छता, शिक्षा, सत्य और सामाजिक परिवर्तन की नींव रखी थी। उपवास के दौरान प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई। ग्रामीणों में उत्सुकता और समर्थन दोनों देखने को मिले। पार्टी सूत्रों के अनुसार यह मौन उपवास सिर्फ चुनावी परिणामों पर आत्ममंथन नहीं, बल्कि आने वाले समय में जन सुराज की राजनीतिक दिशा, रणनीतियों और जनता से सीधे संवाद की नई शुरुआत है।

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