दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की लगभग 30,000 करोड़ रुपये की संपत्ति को लेकर चल रहा विरासत विवाद अब और जटिल हो गया है। इस मामले में एक नया मोड़ तब आया, जब संजय कपूर की मां रानी कपूर ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर ‘रानी कपूर फैमिली ट्रस्ट’ को रद्द करने की मांग की। माना जा रहा है कि यह ट्रस्ट देश की प्रमुख ऑटो कंपोनेंट कंपनी सोना कॉमस्टार में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखता है, जिससे यह कानूनी कदम बेहद अहम बन गया है।
रानी कपूर की यह याचिका ऐसे समय सामने आई है, जब संपत्ति के बंटवारे को लेकर बॉलीवुड अभिनेत्री करिश्मा कपूर के बच्चों और संजय कपूर की तीसरी पत्नी प्रिया सचदेव कपूर के बीच विवाद लगातार गहराता जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रानी कपूर का मुख्य उद्देश्य उस फैमिली ट्रस्ट को निरस्त कराना है, जिसके जरिए सोना कॉमस्टार में हिस्सेदारी नियंत्रित होती है। संजय कपूर सोना कॉमस्टार के चेयरमैन थे। उनका निधन पिछले वर्ष 12 जून को यूके में दिल का दौरा पड़ने से हुआ था। इसके बाद उनकी संपत्ति को लेकर कानूनी खींचतान शुरू हुई। विरासत विवाद की शुरुआत तब हुई, जब संजय कपूर और उनकी पूर्व पत्नी करिश्मा कपूर के बच्चों ने अपने पिता की संपत्ति में हिस्सेदारी का दावा किया। इसके बाद यह मामला धीरे-धीरे कानूनी और पारिवारिक टकराव में बदल गया। इस विवाद में पुराने वैवाहिक समझौते और तलाक से जुड़े दस्तावेज भी केंद्र में आ गए हैं। संजय कपूर की विधवा प्रिया सचदेव कपूर ने अदालत से करिश्मा कपूर और संजय कपूर के बीच हुए तलाक की कार्यवाही से जुड़े प्रमाणित दस्तावेज और आदेश उपलब्ध कराने की मांग की है। प्रिया का कहना है कि इन दस्तावेजों से यह स्पष्ट होगा कि संजय कपूर ने अपने जीवनकाल में करिश्मा कपूर और उनके बच्चों के लिए क्या वित्तीय और कस्टडी व्यवस्थाएं की थीं। अपनी याचिका में प्रिया ने खुद को संजय कपूर की कानूनी रूप से विवाहित पत्नी और प्रत्यक्ष वारिस बताया है।
करिश्मा कपूर पक्ष की दलील
वहीं, करिश्मा कपूर के वकील ने प्रिया की याचिका को निराधार बताते हुए कहा कि यह व्यक्तिगत और गोपनीय जानकारी हासिल करने का प्रयास है। उनका तर्क है कि तलाक की डिक्री पहले ही एक अन्य मामले में रिकॉर्ड पर लाई जा चुकी है, इसलिए इस तरह की मांग सुनवाई योग्य नहीं है। दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति ए.एस. चंदुरकर ने चैंबर हियरिंग के दौरान कहा कि अदालत इस बात पर विचार करेगी कि क्या ये गोपनीय दस्तावेज प्रिया सचदेव कपूर को उपलब्ध कराए जाने चाहिए। साथ ही, करिश्मा कपूर को निर्देश दिया गया है कि वह प्रिया की याचिका पर दो सप्ताह के भीतर अपनी आपत्तियां दाखिल करें। प्रिया की ओर से वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह ने दलील दी कि करिश्मा कपूर के बच्चों द्वारा उठाए गए दावों का सही आकलन करने के लिए तलाक समझौते की स्पष्टता आवश्यक है।
सोना कॉमस्टार जैसी दिग्गज कंपनी में हिस्सेदारी रखने वाले फैमिली ट्रस्ट को रद्द करने की रानी कपूर की मांग ने इस कॉरपोरेट और पारिवारिक विवाद को और उलझा दिया है। अब सभी की नजरें दिल्ली हाईकोर्ट के अगले आदेश पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि 30,000 करोड़ रुपये के इस साम्राज्य का भविष्य किस दिशा में जाएगा।





