27 वर्षों की गौरवशाली सेवा के बाद नासा से सेवानिवृत्त हुईं सुनीता विलियम्स

नासा की वरिष्ठ अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने 27 साल के लंबे और उपलब्धियों से भरे करियर के बाद नासा से सेवानिवृत्ति ले ली है। अंतरिक्ष में कुल 608 दिन बिताने और नौ स्पेसवॉक कर कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड अपने नाम करने वाली सुनीता विलियम्स अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में एक प्रेरक व्यक्तित्व के रूप में जानी जाती हैं।

सुनीता विलियम्स ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2006 में एसटीएस-116 मिशन के तहत स्पेस शटल डिस्कवरी से पहली अंतरिक्ष उड़ान के साथ की थी। इसके बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर तीन प्रमुख मिशनों में भाग लिया। लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने, कई स्पेसवॉक करने और जटिल तकनीकी कार्यों को सफलतापूर्वक अंजाम देने के चलते उन्होंने नासा के इतिहास में खास स्थान बनाया। नासा अधिकारियों और सहयोगियों के अनुसार, सुनीता ने न केवल वैज्ञानिक अभियानों में अहम योगदान दिया, बल्कि नेतृत्व और प्रेरणा का भी मजबूत उदाहरण प्रस्तुत किया।

अमेरिका में जन्म, भारतीय संस्कृति से गहरा जुड़ाव
सुनीता विलियम्स का जन्म 19 सितंबर 1965 को अमेरिका के ओहायो राज्य में हुआ। उनके पिता डॉ. दीपक पांड्या भारतीय मूल के हैं और गुजरात के मेहसाणा जिले के झूलासन गांव से संबंध रखते हैं, जबकि उनकी मां उर्सुलिन बोनी स्लोवेनियाई मूल की हैं। मिश्रित सांस्कृतिक परिवेश में पली-बढ़ी सुनीता को बचपन से ही भारतीय परंपराओं और मूल्यों से जुड़ाव रहा। उनके पिता उन्हें भगवत गीता का पाठ सुनाते थे और वे चर्च भी जाया करती थीं। रामायण और महाभारत की कहानियों ने उनके व्यक्तित्व पर गहरा प्रभाव डाला।

गीता की प्रेरणा के साथ अंतरिक्ष यात्रा
सुनीता विलियम्स अपने अंतरिक्ष अभियानों के दौरान भगवत गीता को भी साथ ले गई थीं। मिशन के बाद 2007 और 2013 में उन्होंने अपने पैतृक गांव झूलासन का दौरा किया। बचपन से ही खेल और फिटनेस में रुचि रखने वाली सुनीता तैराकी में बेहद कुशल थीं और कम उम्र में कई प्रतियोगिताओं में पदक जीत चुकी थीं। प्रारंभिक दौर में वे पशु चिकित्सक बनना चाहती थीं, लेकिन परिस्थितियों ने उन्हें विज्ञान और अंतरिक्ष की ओर मोड़ दिया।

अंतरिक्ष में मैराथन दौड़ने वाली पहली महिला
सुनीता विलियम्स ने अंतरिक्ष में कुल 608 दिन बिताए, जो किसी भी अमेरिकी महिला अंतरिक्ष यात्री के लिए अब तक का सर्वोच्च आंकड़ा है। उन्होंने नौ स्पेसवॉक किए, जिनकी कुल अवधि 62 घंटे 6 मिनट रही, जो महिलाओं में एक रिकॉर्ड है। इसके अलावा, वे अंतरिक्ष में मैराथन दौड़ने वाली दुनिया की पहली महिला भी बनीं।

शिक्षा और नौसेना से अंतरिक्ष तक का सफर
सुनीता विलियम्स ने यूएस नेवल एकेडमी से भौतिकी में स्नातक और फ्लोरिडा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग मैनेजमेंट में मास्टर्स डिग्री प्राप्त की। अमेरिकी नौसेना में सेवा के दौरान उन्होंने 4,000 घंटे से अधिक का उड़ान अनुभव हासिल किया और विभिन्न प्रकार के विमानों को उड़ाया।

बोइंग और स्पेसएक्स मिशनों में अहम योगदान
सुनीता विलियम्स ने एसटीएस-116 और एसटीएस-117 मिशनों के बाद एक्सपेडिशन 14/15 में फ्लाइट इंजीनियर के रूप में काम किया और चार स्पेसवॉक पूरे किए। वर्ष 2012 में एक्सपेडिशन 32/33 के दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की कमान संभाली। हाल के वर्षों में वे बोइंग क्रू फ्लाइट टेस्ट और स्पेसएक्स क्रू-9 मिशन का भी हिस्सा रहीं, जहां उन्होंने स्टेशन संचालन और टीम नेतृत्व में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सुनीता विलियम्स का कहना है कि अंतरिक्ष उनके लिए सबसे प्रिय स्थान रहा है और नासा के साथ उनका 27 साल का सफर जीवन का सबसे गर्वपूर्ण अनुभव है। विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान में उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों, विशेषकर महिलाओं, के लिए प्रेरणा बना रहेगा।

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