
भारत और अमेरिका के बीच बढ़ता पर्यटन सहयोग महज आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि दोनों देशों के लोगों को जोड़ने वाला प्रभावी सेतु बनता जा रहा है। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि यह साझेदारी साझा मूल्यों, उद्यमशील सोच और विदेशों में बसे भारतीय समुदाय की सक्रिय भूमिका पर आधारित है। मंगलवार को आयोजित यूएस-इंडिया स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फोरम के टूरिज्म समिट 2026 में संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय पर्यटन संबंध केवल व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि यह लोगों के बीच गहरे भावनात्मक और सांस्कृतिक रिश्तों को भी मजबूत करते हैं। उनके अनुसार पर्यटन एक उद्योग भर नहीं, बल्कि संस्कृतियों को जोड़ने वाला पुल, वैश्विक आर्थिक अवसरों का स्रोत और सॉफ्ट डिप्लोमेसी का प्रभावी साधन है।
अर्थपूर्ण अनुभव की तलाश में आधुनिक यात्री
उपराष्ट्रपति ने बताया कि आज का पर्यटक केवल यात्रा नहीं, बल्कि प्रामाणिक अनुभव, स्थिरता, संस्कृति, विरासत, स्वास्थ्य और सार्थक जुड़ाव चाहता है। उन्होंने इसे भारत और अमेरिका दोनों के लिए पर्यटन क्षेत्र में जिम्मेदार और सुदृढ़ तंत्र विकसित करने का उपयुक्त अवसर बताया। कार्यक्रम के दौरान यूएसआईएसपीएफ ने अपनी रिपोर्ट ‘स्टेट ऑफ इंडिया टूरिज्म 2026’ जारी की, जिसे पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने उपराष्ट्रपति को सौंपा। समिट में नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और अन्य प्रमुख हितधारकों ने भारत के पर्यटन क्षेत्र के भविष्य और संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की।






