केरल का नाम बदलने के प्रस्ताव को लेकर सियासी माहौल गरमाया

शशि थरूर ने कहा, अब केरल के लोगों को अंग्रेजी में क्या कहा जाएगा

केरल का नाम बदलकर “केरलम” करने के प्रस्ताव को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। केरल विधानसभा पहले ही दो बार इस संबंध में प्रस्ताव पारित कर चुकी है और अब केंद्र सरकार की कैबिनेट से भी इसे मंजूरी मिल चुकी है। इस बीच शशि थरूर ने इस मुद्दे पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी कर नई चर्चा छेड़ दी है। तिरुवनंतपुरम से सांसद थरूर ने सोशल मीडिया पर मजाकिया अंदाज में सवाल उठाया कि यदि राज्य का नाम “केरलम” हो जाता है तो अंग्रेज़ी में वहां के लोगों को क्या कहा जाएगा। उनका कहना था कि “केरलाइट” या “केरलन” जैसे शब्दों का क्या विकल्प होगा, क्योंकि “केरलमाइट” सुनने में किसी सूक्ष्म जीव जैसा लगता है और “केरलमियन” किसी खनिज जैसा प्रतीत होता है। उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय को टैग करते हुए सुझाव दिया कि नए शब्द के लिए प्रतियोगिता आयोजित की जा सकती है।

नाम परिवर्तन की मांग दरअसल राज्य की मलयालम वर्तनी के अनुरूप आधिकारिक नाम अपनाने को लेकर है। प्रस्ताव में केंद्र से संविधान संशोधन की मांग की गई है ताकि सभी भाषाओं में राज्य का नाम “केरलम” किया जा सके। अब कैबिनेट की सहमति के बाद यह प्रक्रिया औपचारिक रूप लेने की ओर बढ़ती दिख रही है। इस विषय पर राजनीतिक दलों का रुख भी समर्थन में बताया जा रहा है। राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि “केरलम” नाम राज्य की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं के अनुरूप है। उनके अनुसार लोग बदलाव चाहते हैं और प्रतीकात्मक राजनीति भी जनभावनाओं का हिस्सा है। सूत्रों के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) तीनों प्रमुख दल इस नाम परिवर्तन के पक्ष में माने जा रहे हैं।
थरूर की टिप्पणी के बाद अब नाम बदलने की बहस केवल संवैधानिक या प्रशासनिक मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि भाषाई पहचान और वैश्विक संदर्भ में राज्य की छवि को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।

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