भारतीय डाक विभाग में डिजिटल क्रांति: पासपोर्ट व बैंकिंग सेवायें बनी लाइफलाइन

भारतीय डाक विभाग ने 2025 में खुद को पारंपरिक चिट्ठी-पत्री तक सीमित रखने के बजाय डिजिटल समावेशन और नागरिक सेवाओं के व्यापक मंच के रूप में पुनर्स्थापित किया है। पासपोर्ट, आधार, बैंकिंग और ‘डिजिपिन’ जैसी पहलों के जरिए विभाग ने अपनी सेवाओं का कायाकल्प करते हुए आमजन के जीवन में अपनी उपयोगिता को नई ऊंचाई दी है। यह वर्ष भारतीय डाक के लिए परिवर्तनकारी सिद्ध हुआ। संचार मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले इस विभाग ने अपने विशाल नेटवर्क का प्रभावी उपयोग कर शहरी ही नहीं, बल्कि ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों में भी डिजिटल, वित्तीय और प्रशासनिक सेवाओं की कमी को पाटने का कार्य किया। मंत्रालय के ईयर-एंड रिव्यू के अनुसार, डाक विभाग अब आम लोगों के लिए सेवाओं की एक मजबूत रीढ़ के रूप में उभर चुका है।

पासपोर्ट और आधार सेवाओं में उल्लेखनीय विस्तार
नागरिक सुविधाओं के विस्तार में ‘डाकघर पासपोर्ट सेवा केंद्र’ सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में सामने आए। विदेश मंत्रालय के सहयोग से 30 नवंबर 2025 तक देशभर में 452 डाकघर पासपोर्ट सेवा केंद्र संचालित हुए, जिससे पासपोर्ट सेवाएं लगभग हर लोकसभा क्षेत्र तक पहुंचीं। जनवरी से नवंबर के बीच 29 लाख से अधिक पासपोर्ट आवेदनों का निपटारा हुआ, जिससे आवेदकों को सुविधा मिली और विभाग को 114.88 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। आधार सेवाओं के क्षेत्र में भी डाक विभाग की भूमिका अहम रही। देशभर में 13,000 से अधिक आधार केंद्र डाकघरों से संचालित हुए। ‘राष्ट्रीय डाक सप्ताह’ के दौरान स्कूलों में 1,500 से अधिक विशेष शिविर लगाए गए। वर्ष 2025 में कुल 2.35 करोड़ से अधिक आधार नामांकन और अपडेट किए गए, जिनसे 129.13 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित हुआ।

डोर-स्टेप केवाईसी से वित्तीय समावेशन को बल
वित्तीय समावेशन को प्राथमिकता देते हुए डाक विभाग ने म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए लगभग 5 लाख डोर-स्टेप केवाईसी सत्यापन पूरे किए। एएमएफआई, यूटीआई और एसबीआई म्यूचुअल फंड जैसे संस्थानों के साथ समझौतों ने डाकघरों को निवेश वितरण का भरोसेमंद माध्यम बना दिया।

सिम कार्ड बिक्री और रिचार्ज की सुविधा
दूरसंचार क्षेत्र में बीएसएनएल के साथ साझेदारी कर विभाग ने अपनी पहुंच और बढ़ाई। अब 1.64 लाख से अधिक डाकघरों में सिम कार्ड बिक्री और रिचार्ज की सुविधा उपलब्ध है, जिससे नेटवर्क की कमी वाले क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूती मिली है।

तकनीकी नवाचार: ‘डिजिपिन’
इसरो और आईआईटी हैदराबाद के सहयोग से लॉन्च किया गया ‘डिजिपिन’ 10 अक्षरों वाली जियो-कोडेड डिजिटल एड्रेस प्रणाली देश के हर 4×4 मीटर ग्रिड की विशिष्ट पहचान सुनिश्चित करती है। इस नवाचार को एशियन-पैसिफिक पोस्टल यूनियन बिजनेस फोरम में अंतरराष्ट्रीय सराहना मिली।

निर्यात, रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा
लघु उद्योगों और कारीगरों को वैश्विक बाजार से जोड़ने के लिए ‘डाक घर निर्यात केंद्र’ पहल को 1,000 से अधिक केंद्रों तक विस्तारित किया गया। इसके माध्यम से लगभग 287 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ, जिससे महिला उद्यमियों और एमएसएमई को प्रत्यक्ष लाभ मिला। साथ ही, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत 1.69 लाख इकाइयों का भौतिक सत्यापन कर रोजगार सृजन में योगदान दिया गया।

सांस्कृतिक पहल और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति
‘हर घर तिरंगा’ अभियान 4.0 के तहत 28 लाख से अधिक राष्ट्रीय ध्वजों का वितरण किया गया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, यूपीआई-यूपीयू इंटरलिंकेज की सफल शुरुआत और रूस के साथ ‘इंटरनेशनल ट्रैक्ड पैकेट सर्विस’ समझौते ने भारत की पोस्टल डिप्लोमेसी को नई मजबूती प्रदान की।

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